नई दिल्ली 26 सितंबर 2026 : पेट और भोजन की नली के कैंसर की शुरुआती पहचान में एआई आधारित एंडोस्कोपी की मदद लेने के लिए एम्स नई और फुजीफिल्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने समझौता किया है। इसके तहत देश के कई चिकित्सा केंद्रों में अध्ययन किया जाएगा।
पता लगाया जाएगा कि एआई आधारित एंडोस्कोपी की मदद से ऊपरी पाचन तंत्र के कैंसर के शुरुआती संकेतों की पहचान कितनी बेहतर हो सकती है।
एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग के प्रो. डॉ. विनीत आहूजा और डॉ. अमित यादव इस अध्ययन का नेतृत्व करेंगे। अध्ययन में एआई की सहायता से होने वाली हाई-डेफिनिशन व्हाइट लाइट एंडोस्कोपी (एचडी-डब्ल्यूएलई) की तुलना सामान्य एचडी-डब्ल्यूएलई से की जाएगी।
इससे यह आकलन किया जाएगा कि एंडोस्कोपी के दौरान कैंसर के शुरुआती संकेतों को पहचानने में एआई डाक्टरों की कितनी मदद कर सकती है।

एंडोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल
अध्ययन में देश के कई चिकित्सा केंद्रों को शामिल किया जाएगा। इसमें एम्स की चिकित्सा विशेषज्ञता के साथ फुजीफिल्म की एंडोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
एंडोस्कोपी के दौरान एआई प्रभावित हिस्सों की पहचान में डाक्टरों को सहयोग करेगी। अध्ययन के माध्यम से इसकी उपयोगिता और प्रभाव का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन किया जाएगा।
एम्स के अनुसार, समझौते के दौरान निदेशक प्रो. निखिल टंडन, डीन (रिसर्च) प्रो. राधिका टंडन, गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. प्रमोद गर्ग, सीएसआर समिति के चेयरमैन प्रो. गोविंद मखारिया और फुजीफिल्म इंडिया के प्रबंध निदेशक कोजी वाडा मौजूद रहे।
एंडोस्कोपी की भूमिका को समझने में मिलेगी मदद
एम्स ने बताया कि इस सहयोग का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल और शोध को बढ़ावा देना है। अध्ययन के परिणाम से ऊपरी पाचन तंत्र के कैंसर की शुरुआती पहचान में एआई आधारित एंडोस्कोपी की भूमिका को समझने में मदद मिलेगी।
