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Mental Healthcare Act लागू न होने पर हाईकोर्ट सख्त, पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ को दिए निर्देश

18 सितंबर, 2026 :  Mental Healthcare Act, 2017 के प्रावधानों को पूरी तरह लागू नहीं किए जाने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि कानून के तहत बनाए गए प्रावधानों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जा सकता और संबंधित संस्थाओं को प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए।

हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा को अपने-अपने State Mental Health Authorities की वार्षिक रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन को चार सप्ताह के भीतर Mental Health Authority का गठन सुनिश्चित करने को कहा गया है। कोर्ट ने तीनों को यह भी निर्देश दिया कि Mental Healthcare Act के तहत जरूरी सभी संस्थाओं को कार्यात्मक बनाया जाए, ताकि नागरिकों को प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

पंजाब के नियमों को लेकर कोर्ट ने जताई आपत्ति

सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे का भी हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। हलफनामे में बताया गया था कि Mental Healthcare Act के तहत बनाए गए नियमों को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन उन्हें अभी अधिसूचित नहीं किया गया है क्योंकि उन्हें विधानसभा के सामने रखा जाना बाकी है।

हाईकोर्ट ने इस स्थिति को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत माना। कोर्ट ने Mental Healthcare Act की धारा 121(2) का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद नियमों को पहले अधिसूचित किया जाना है और उसके बाद उन्हें संबंधित विधानसभा के सामने रखा जाना है।

कोर्ट ने कहा- कानून ‘लेटर एंड स्पिरिट’ में लागू नहीं हुआ

पीठ ने कहा कि Mental Healthcare Act के तहत कुछ कदम जरूर उठाए गए हैं, लेकिन इसके प्रावधानों को अभी तक “letter and spirit” में लागू नहीं किया गया है। कोर्ट ने विशेष रूप से State Mental Health Authority के गठन को लेकर कहा कि यह प्रक्रिया काफी हद तक “empty formality” बनकर रह गई है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि Mental Healthcare Act एक महत्वपूर्ण कानून है और केंद्र तथा राज्य सरकारों के संबंधित अधिकारियों को इसके प्रावधानों के अनुसार इसे लागू करना जरूरी है। कोर्ट ने अधिकारियों से कानून के अनुपालन को लेकर अधिक संवेदनशीलता और सावधानी बरतने की अपेक्षा जताई।

Mental Health Authority की भूमिका महत्वपूर्ण

Mental Healthcare Act, 2017 के तहत राज्यों में State Mental Health Authority की व्यवस्था की गई है। कानून की धारा 45 राज्य सरकारों को State Mental Health Authority स्थापित करने का प्रावधान करती है। इसके अलावा कानून में अथॉरिटी की संरचना, कार्यों और वार्षिक रिपोर्ट से जुड़े प्रावधान भी मौजूद हैं।

कोर्ट ने इसी संदर्भ में पंजाब और हरियाणा से संबंधित अथॉरिटीज की वार्षिक रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश करने को कहा है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि कानून के तहत गठित संस्थाएं किस तरह काम कर रही हैं और उनके वैधानिक दायित्वों का पालन किस स्तर तक हुआ है।

चंडीगढ़ को चार सप्ताह का समय

चंडीगढ़ प्रशासन के मामले में हाईकोर्ट ने Mental Health Authority के गठन के लिए चार सप्ताह की समयसीमा तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत जरूरी संस्थाओं का गठन और उनका प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को सभी आवश्यक संस्थाओं को कार्यात्मक बनाने के निर्देश भी दिए, ताकि Mental Healthcare Act के तहत गठित अथॉरिटीज अपने वैधानिक दायित्वों को प्रभावी तरीके से निभा सकें और लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

जनहित याचिका पर हुई सुनवाई

यह मामला Pushpanjali Trust की ओर से दाखिल जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में Mental Healthcare Act, 2017 के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दे उठाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कानून के प्रावधानों, State Mental Health Authorities की स्थिति और जरूरी संस्थाओं के कामकाज से संबंधित पहलुओं की समीक्षा की। कोर्ट ने कहा कि कानून लागू करने में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।

2018 में लागू हुआ था Mental Healthcare Act

Mental Healthcare Act, 2017 देश में 29 मई 2018 से लागू हुआ था। इस कानून का उद्देश्य मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

कानून में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, State Mental Health Authorities, Mental Health Review Boards और Mental Health Establishments से संबंधित विभिन्न प्रावधान शामिल हैं।

5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा को संबंधित वार्षिक रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने तथा चंडीगढ़ प्रशासन को चार सप्ताह के भीतर Mental Health Authority के गठन की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

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