7 सितंबर 2026 मुंबई में चूहों का बढ़ता प्रकोप अब लोगों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। चूहों की संख्या पर नियंत्रण पाने और उनसे फैलने वाली बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए मुंबई महानगरपालिका लगातार अभियान चला रही है। महानगरपालिका के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 1 जुलाई से 15 अगस्त के बीच 46 दिनों में कुल 4,702 चूहों का बंदोबस्त किया गया।
महानगरपालिका की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब बारिश के मौसम में चूहों से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ जाती हैं। चूहे न केवल खाद्य सामग्री और अन्य वस्तुओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि उनकी वजह से संक्रमण फैलने का खतरा भी रहता है।
46 दिनों में 4,702 चूहों पर कार्रवाई
मुंबई महानगरपालिका के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई से 30 जुलाई के बीच कुल 3,406 चूहों का बंदोबस्त किया गया। इनमें 2,623 चूहों को पिंजरों की मदद से पकड़ा गया, जबकि 783 चूहों के लिए मूषकनाशक दवाओं का इस्तेमाल किया गया।
इसके बाद 1 अगस्त से 15 अगस्त के बीच 1,296 चूहों का बंदोबस्त किया गया। इस दौरान 1,119 चूहों को पिंजरों में पकड़ा गया और 178 चूहों को मूषकनाशक दवाओं के जरिए नियंत्रित किया गया। इस तरह दोनों अवधि को मिलाकर कुल संख्या 4,702 रही।
बारिश के मौसम में बढ़ती चिंता
मुंबई में मानसून के दौरान कई इलाकों में पानी जमा होने और कचरे की समस्या के कारण चूहों की गतिविधियां बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में महानगरपालिका का सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग चूहों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग उपाय कर रहा है।
चूहे इमारतों, गोदामों, नालों, कचरे के आसपास और अन्य स्थानों पर अपना ठिकाना बना सकते हैं। इनके कारण निर्माण सामग्री, तार और दूसरी वस्तुओं को भी नुकसान पहुंच सकता है।
लेप्टोस्पायरोसिस के 189 मामले
चूहों के बढ़ते प्रकोप के बीच मुंबई में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ाई है। रिपोर्ट के अनुसार, जून, जुलाई और अगस्त के दौरान मुंबई में लेप्टोस्पायरोसिस के 189 मामले दर्ज किए गए। इसी अवधि में गैस्ट्रो के 1,752 मामले भी सामने आए।
रिपोर्ट के मुताबिक कमलानगर, संगमनगर, जीटीबी नगर, शिवाजीनगर, नानीमामू चॉल, शास्त्रीनगर, साकीनाका, चकला एमआईडीसी और धारावी जैसे इलाकों में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई।
चूहों से कैसे फैल सकता है संक्रमण?
चूहे कई तरह के संक्रमणों के वाहक हो सकते हैं। उनकी पेशाब, मल और लार के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। खासतौर पर चूहे के मूत्र से दूषित पानी या कीचड़ अगर त्वचा पर मौजूद घाव के संपर्क में आए या आंख, नाक और मुंह के जरिए शरीर में पहुंचे तो संक्रमण हो सकता है।
इसी वजह से बारिश के मौसम में साफ-सफाई और आसपास पानी या कचरा जमा न होने देना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पिंजरों से पकड़े जा रहे चूहे
महानगरपालिका की ओर से चूहों को नियंत्रित करने के लिए पिंजरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। 1 जुलाई से 15 अगस्त के बीच कुल 3,742 चूहों को पिंजरों के जरिए पकड़ा गया।
वहीं, 961 चूहों को मूषकनाशक दवाओं के इस्तेमाल से नियंत्रित किया गया। आंकड़ों से पता चलता है कि इस अवधि में चूहों को पकड़ने के लिए पिंजरों का इस्तेमाल अधिक किया गया।
नागरिकों की भूमिका भी अहम
चूहों की संख्या पर नियंत्रण केवल महानगरपालिका की कार्रवाई से संभव नहीं है। शहर में कचरा खुले में न फेंकना, खाने-पीने की चीजें खुले में न छोड़ना और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना भी जरूरी है।
जहां कचरा और खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध होते हैं, वहां चूहों को भोजन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए नागरिकों की ओर से स्वच्छता का ध्यान रखना भी चूहों के प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी
मुंबई में चूहों के प्रकोप और उनसे जुड़े स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए महानगरपालिका का सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 46 दिनों में 4,702 चूहों का बंदोबस्त किए जाने के आंकड़े बताते हैं कि समस्या से निपटने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
बारिश के मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ने के कारण चूहों की संख्या नियंत्रित करना और संभावित संक्रमण के स्रोतों को कम करना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
