7 सितंबर 2026 हरियाणा में आलू किसानों को पिछले फसल सीजन की भावांतर भरपाई योजना (BBY) के तहत मिलने वाली लंबित आर्थिक सहायता का अभी भी इंतजार है। भारतीय किसान यूनियन (चरूनी) ने राज्य सरकार से मांग की है कि अगले सीजन की आलू बुवाई शुरू होने से पहले किसानों का बकाया मुआवजा जारी किया जाए।
कम बाजार भाव के कारण किसानों को हुआ नुकसान
भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को उस स्थिति में राहत दी जाती है, जब उनकी फसल सरकार की ओर से तय सुरक्षित मूल्य से कम कीमत पर बिकती है। पिछले सीजन में आलू का सुरक्षित मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था।
आलू की आवक बढ़ने और बाजार में मांग कमजोर रहने के कारण बड़ी मात्रा में किसानों की फसल सुरक्षित मूल्य से कम कीमत पर बिकी। इससे कई किसानों को उत्पादन लागत निकालने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दो किस्तें जारी, फिर भी कई किसानों को भुगतान नहीं
BKU (चरूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चरूनी ने कहा कि सरकार की ओर से योजना के तहत दो किस्तें जारी की जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान अभी भी अपनी लंबित राशि का इंतजार कर रहे हैं।
चरूनी के मुताबिक, आलू की अगली बुवाई का समय नजदीक आ गया है और किसानों को बीज सहित खेती से जुड़े अन्य खर्चों के लिए पैसों की जरूरत है। ऐसे में पिछले सीजन की राहत राशि में देरी किसानों की आर्थिक परेशानी को और बढ़ा रही है।
करीब 90 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा
BKU (चरूनी) ने दावा किया है कि राज्य में आलू किसानों की करीब 90 करोड़ रुपये की राशि अभी बकाया है। किसान संगठन के अनुसार, उसे जानकारी दी गई थी कि पिछले महीने करीब 50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, लेकिन यह राशि अभी तक किसानों के बैंक खातों में नहीं पहुंची है।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि जिन किसानों के लिए राशि पहले ही मंजूर हो चुकी है, उन्हें बिना देरी भुगतान किया जाए।
अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू हो सकती है बुवाई
BKU के प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि आलू की बुवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। किसानों को बीज खरीदने के साथ-साथ खाद, डीजल, कीटनाशक और खेती से जुड़े अन्य खर्चों के लिए पूंजी की जरूरत होगी।
ऐसे में यदि पिछले सीजन की राहत राशि समय पर नहीं मिलती है तो किसानों के सामने नए फसल सीजन की शुरुआत में आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
बढ़ती लागत ने बढ़ाई किसानों की चिंता
किसान संगठन ने कहा कि पहले ही डीजल, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट की लागत बढ़ने से किसानों पर आर्थिक दबाव है। इसके साथ ही पिछले सीजन में आलू की कम कीमतों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
BKU (चरूनी) का कहना है कि ऐसे समय में सरकार की ओर से घोषित राहत राशि में देरी किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रही है।
सरकार से भुगतान की स्पष्ट समयसीमा की मांग
किसान संगठन ने राज्य सरकार से लंबित भुगतान जारी करने के साथ-साथ किसानों को यह भी बताने की मांग की है कि बकाया राशि कब तक उनके खातों में पहुंचाई जाएगी।
राकेश बैंस ने कहा कि सरकार को लंबित भुगतान के लिए स्पष्ट समयसीमा घोषित करनी चाहिए और जिन किसानों की राशि मंजूर हो चुकी है, उन्हें तत्काल भुगतान किया जाना चाहिए।
भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
BKU (चरूनी) ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित मुआवजा जल्द जारी नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। संगठन ने इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
किसान संगठन की मुख्य मांग है कि अक्टूबर में नई आलू फसल की बुवाई शुरू होने से पहले पिछले सीजन की भावांतर राहत किसानों को मिल जाए, ताकि वे नए फसल चक्र के लिए आवश्यक खर्च जुटा सकें।
किसानों को राहत का इंतजार
भावांतर भरपाई योजना का उद्देश्य बाजार में कम कीमत मिलने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। लेकिन लंबित भुगतान को लेकर किसानों की चिंता यह है कि यदि राहत राशि समय पर नहीं मिली तो नई फसल की तैयारी के दौरान उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ेगा।
