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यमुनानगर की 40% प्लाईवुड इकाइयों ने अपनाया urea-free resin, लागत और उत्सर्जन घटाने की उम्मीद

7 सितंबर 2026  हरियाणा के यमुनानगर जिले की प्लाईवुड इंडस्ट्री में तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले की करीब 40 प्रतिशत प्लाईवुड निर्माण इकाइयों ने urea-free resin का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार, इस नई तकनीक के शुरुआती औद्योगिक परीक्षण उत्साहजनक रहे हैं और इसके व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल की अच्छी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

प्लाईवुड निर्माण में इस्तेमाल होने वाले resin को लेकर यह बदलाव उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। urea-free resin के इस्तेमाल से पारंपरिक urea आधारित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ उत्पादन लागत और उत्सर्जन को कम करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। हालांकि, वास्तविक बचत कच्चे माल की कीमत, ऊर्जा खपत, उत्पादन क्षमता और निर्माण प्रक्रिया जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

करीब 40% इकाइयों ने शुरू किया इस्तेमाल

हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जेके बिहानी के अनुसार, यमुनानगर क्षेत्र की लगभग 40 प्रतिशत प्लाईवुड इकाइयां urea-free resin का इस्तेमाल शुरू कर चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि इस resin को तैयार करने के लिए अलग-अलग formulation methods का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें soy protein, wheat flour, melamine, lignin और starch जैसे पदार्थों के साथ अन्य reactive chemicals का इस्तेमाल शामिल हो सकता है।

एसोसिएशन के अनुसार, शुरुआती परिणामों में इस सामग्री को प्लाईवुड उत्पादन के लिए व्यावहारिक रूप से उपयोगी पाया गया है।

उत्पादन लागत घटाने की उम्मीद

यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री के लिए उत्पादन लागत एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य और जगाधरी के प्लाईवुड निर्माता अनिल गर्ग के मुताबिक, urea-free resin की लागत तकनीकी ग्रेड urea की तुलना में काफी कम हो सकती है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक बचत कई परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। इसमें कच्चे माल की कीमत, resin की formulation, ऊर्जा की खपत, उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता की आवश्यकताएं और उत्पादन का पैमाना शामिल हैं।

इसलिए फिलहाल लागत में कितनी कमी आएगी, इसका निश्चित आंकड़ा बताना जल्दबाजी होगी।

resin तैयार करने में तकनीकी सावधानी जरूरी

विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, urea-free resin का उत्पादन सामान्य प्रक्रिया की तरह नहीं किया जा सकता। इसके लिए तापमान, formulation ratio, reaction time, pH, moisture और pressing conditions को सावधानी से नियंत्रित करना जरूरी है।

व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने से पहले laboratory validation और विभिन्न गुणवत्ता परीक्षणों की जरूरत बताई गई है। इनमें bonding strength, water resistance, pressing performance, emissions और तैयार plywood की गुणवत्ता की जांच शामिल है।

इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि नई resin technology से तैयार plywood आवश्यक गुणवत्ता मानकों को पूरा करे।

प्रशिक्षित resin technicians की कमी

नई तकनीक के सामने एक चुनौती प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की कमी भी है। जगाधरी स्थित Shri Hari Plywood के मालिक अजय गर्ग के अनुसार, उद्योग में प्रशिक्षित resin technicians की कमी है।

उनका कहना है कि अगर पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता और structured training की व्यवस्था हो, तो urea-free resin को अपनाने की प्रक्रिया को और तेज किया जा सकता है।

इसका मतलब है कि तकनीकी बदलाव के साथ उद्योग को skilled manpower तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा।

बाजार में imported ready-made powders भी उपलब्ध

एसएस प्लाईवुड के सतीश सैनी ने बताया कि बाजार में कई imported ready-made powders उपलब्ध होने लगे हैं। इन powders को supplier द्वारा बताए गए process के अनुसार kettle में react करके urea-free resin तैयार किया जा सकता है।

हालांकि उन्होंने manufacturers को सावधानी बरतने की सलाह दी है। किसी भी सामग्री के इस्तेमाल से पहले उसकी technical documentation, safety instructions, batch performance, certifications और तैयार plywood की गुणवत्ता को verify करना जरूरी बताया गया है।

formaldehyde emissions कम करने की संभावना

Urea-free resin को अपनाने का एक संभावित फायदा emissions में कमी से भी जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, research में soy-based और अन्य bio-based materials को wood-based panels में formaldehyde emissions कम करने के संभावित विकल्पों के तौर पर देखा गया है।

इससे भविष्य में कम उत्सर्जन वाले plywood products तैयार करने के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, वास्तविक environmental benefits resin formulation और manufacturing process पर निर्भर करेंगे।

subsidised urea की खपत में भी कमी

यमुनानगर जिले में agriculture-grade subsidised urea की खपत में भी पिछले वित्त वर्ष के दौरान कमी दर्ज की गई। Haryana Agriculture and Farmers Welfare Department के POS data के अनुसार, जिले में urea consumption 2024-25 में 1,52,725.068 MT से घटकर 2025-26 में 1,25,114.692 MT रह गया।

यह करीब 27,610 MT यानी 22.06 प्रतिशत की कमी है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कमी लगभग 6.136 लाख 45-किलोग्राम बैग के बराबर है।

सरकार की subsidy पर भी असर

रिपोर्ट के अनुसार, औसत ₹2,000 प्रति बैग subsidy के आधार पर इस कमी से सरकार को करीब ₹123 करोड़ की अनुमानित subsidy saving हुई। यमुनानगर के Deputy Director, Agriculture and Farmers Welfare Department आदित्य प्रताप डबास ने इसे fertiliser consumption को rationalise करने और subsidy burden कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

प्लाईवुड उद्योग में urea-free resin का बढ़ता इस्तेमाल इस संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार कुछ plywood factories में subsidised agriculture-grade urea का इस्तेमाल glue तैयार करने के लिए किए जाने की बात सामने आई थी।

आगे और इकाइयों में बढ़ सकता है इस्तेमाल

यमुनानगर देश के प्रमुख plywood manufacturing centres में शामिल है। ऐसे में अगर urea-free resin तकनीकी रूप से सफल, गुणवत्ता के लिहाज से भरोसेमंद और आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी साबित होता है, तो आने वाले समय में इसके इस्तेमाल का दायरा बढ़ सकता है।

हालांकि उद्योग के लिए यह जरूरी होगा कि नई तकनीक को अपनाते समय उत्पाद की गुणवत्ता, सुरक्षा, emissions और manufacturing standards से समझौता न हो।

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