3 सितंबर 2026 पंजाब पुलिस में हालिया फेरबदल के बाद वरिष्ठ IPS अधिकारी गुरप्रीत सिंह भुल्लर को सीमा क्षेत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें IGP Border Range नियुक्त किया गया है। इस रेंज में अमृतसर रूरल, बटाला, गुरदासपुर और पठानकोट जिले शामिल हैं और यह क्षेत्र पाकिस्तान के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
नई जिम्मेदारी के साथ भुल्लर के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सीमा पार से होने वाली ड्रोन घुसपैठ को रोकना है। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन का इस्तेमाल सीमा पार से नशीले पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित सामान की तस्करी के लिए किया जा रहा है। लगातार हो रही ऐसी गतिविधियों का असर पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर भी पड़ रहा है।
सीमा क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ चिंता का विषय
रिपोर्ट के मुताबिक, गुरदासपुर और अमृतसर रूरल पुलिस जिलों के सीमा से लगते गांवों में औसतन दो ड्रोन प्रतिदिन आने का अनुमान लगाया गया है। रात के अंधेरे और कम दृश्यता वाले मौसम का फायदा उठाकर इन ड्रोन के जरिए तय स्थानों पर सामान गिराने की कोशिश की जाती है।
ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल ने पारंपरिक तस्करी के तरीकों को भी बदल दिया है। पहले तस्करों के लिए सीमा की बाड़ और जमीन पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को पार करना बड़ी चुनौती होती थी, लेकिन ड्रोन की मदद से सीमा पार से सामान सीधे खेतों या पहले से तय स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
नशे की तस्करी में ड्रोन का इस्तेमाल
सीमा क्षेत्र में ड्रोन के जरिए हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स पहुंचाए जाने की घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सीमा के नजदीक गांवों से हाई-ग्रेड अफगान हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की बरामदगी होती रही है।
इस वजह से ड्रोन घुसपैठ को केवल सीमा सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि पंजाब के नशे के खिलाफ अभियान से भी सीधे जुड़ी चुनौती माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक सीमा पार से आने वाले ड्रोन को प्रभावी तरीके से रोका नहीं जाता, तब तक नशे की सप्लाई चेन को पूरी तरह तोड़ना मुश्किल रहेगा।
अब ज्यादा आधुनिक ड्रोन बन रहे चुनौती
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन की तकनीक में भी बदलाव आया है। शुरुआती दौर में इस्तेमाल होने वाले सामान्य क्वाडकॉप्टर अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ते थे और उन्हें पकड़ना आसान होता था। अब ज्यादा आधुनिक ड्रोन अधिक ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम बताए जा रहे हैं, जिससे उन्हें पहचानना और बीच रास्ते में रोकना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा कुछ ड्रोन में ऐसी तकनीक के इस्तेमाल की भी बात सामने आई है, जिससे उड़ान के बाद GPS लोकेशन और फ्लाइट लॉग जैसी जानकारी मिटाई जा सकती है। इससे जांच एजेंसियों के लिए ड्रोन के वास्तविक लॉन्च प्वाइंट और उसके ऑपरेटर तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
‘बाज आंख’ एंटी-ड्रोन सिस्टम से निगरानी
ड्रोन घुसपैठ को रोकने के लिए पंजाब पुलिस की ओर से तकनीकी साधनों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। सीमा क्षेत्र में ‘बाज आंख’ (Hawk Eye) एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किया गया है। इसका उद्देश्य वायर फेंसिंग के आसपास अनधिकृत हवाई गतिविधियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करने में मदद करना है।
इसके साथ ही सीमा से लगे गांवों में Village Level Defence Committees (VLDCs) भी बनाई गई हैं। इन समितियों के सदस्य पुलिस के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था का काम करते हैं और संदिग्ध ड्रोन गतिविधि या आसमान में असामान्य आवाज सुनाई देने पर सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देने में मदद करते हैं।
नशे के खिलाफ अभियान से सीधा संबंध
पंजाब सरकार की ओर से नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की कथित तस्करी इस अभियान के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सीमा सुरक्षा को मजबूत किए बिना नशे की सप्लाई चेन पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल होगा।
गुरप्रीत सिंह भुल्लर के लिए इसलिए यह नई पोस्टिंग बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्हें ऐसे इलाके की जिम्मेदारी मिली है, जहां सीमा सुरक्षा के साथ-साथ ड्रग तस्करी, हथियारों की तस्करी और ड्रोन गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
भुल्लर के अनुभव की होगी परीक्षा
गुरप्रीत सिंह भुल्लर इससे पहले अमृतसर के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके हैं। अगस्त में उन्हें अमृतसर पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया गया था। अब कुछ ही सप्ताह बाद उन्हें दोबारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमा क्षेत्र में अहम जिम्मेदारी दी गई है।
अब उनकी प्राथमिकता सीमा क्षेत्र में पुलिस, BSF और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर ड्रोन घुसपैठ को रोकना होगी। सीमा से जुड़े गांवों में मजबूत खुफिया नेटवर्क और तकनीकी निगरानी को और प्रभावी बनाना भी अहम रहेगा।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण
सीमा पार से ड्रोन की लगातार बढ़ती गतिविधियां पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौती पेश कर रही हैं। ऐसे में नए IG गुरप्रीत सिंह भुल्लर के सामने केवल ड्रोन को हवा में पहचानने और रोकने की चुनौती नहीं है, बल्कि उसके पीछे काम कर रहे तस्करी नेटवर्क तक पहुंचना भी जरूरी होगा।
अगर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तकनीकी निगरानी, स्थानीय खुफिया तंत्र और सीमा सुरक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सफल रहती हैं, तो ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। भुल्लर के कार्यकाल में सीमा क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ को कम करना उनकी पुलिसिंग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।
