31 अगस्त 2026 : एक अध्ययन के अनुसार, नहरों के जरिए पानी को खेतों के अंतिम छोर यानी टेल एंड तक पहुंचाने से भूजल पर दबाव कम करने में मदद मिली है। अध्ययन में सामने आया है कि पिछले दो वर्षों में देश में अति-दोहन (ओवर-एक्सप्लॉइटेड) श्रेणी वाले भूजल ब्लॉकों की संख्या 115 से घटकर 110 रह गई है।
टेल एंड तक पहुंचा नहर का पानी
अध्ययन के मुताबिक, नहर के पानी की बेहतर उपलब्धता से उन क्षेत्रों के किसानों को राहत मिली है जहां सिंचाई के लिए लंबे समय से भूजल पर निर्भरता अधिक रही है।
नहर का पानी खेतों के अंतिम छोर तक पहुंचने से किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और बोरवेल पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे भूजल के अत्यधिक दोहन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
दो साल में पांच ब्लॉक कम हुए
अध्ययन में बताया गया है कि दो वर्षों की अवधि में अति-दोहन वाले भूजल ब्लॉकों की संख्या 115 से घटकर 110 हो गई। यह बदलाव भूजल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था में सुधार की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, देश के कई हिस्सों में भूजल का अत्यधिक दोहन अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भूजल बचाने में नहरों की अहम भूमिका
कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए भूजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। खासकर ऐसे इलाकों में जहां पर्याप्त सतही जल उपलब्ध नहीं होता, किसान ट्यूबवेल पर निर्भर रहते हैं।
नहरों के पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को वैकल्पिक सिंचाई स्रोत मिलता है। इससे भूजल स्तर पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सकता है।
टेल एंड तक पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती
नहर प्रणाली में पानी को अंतिम छोर तक पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। कई बार नहर के शुरुआती हिस्सों में अधिक पानी इस्तेमाल होने के कारण टेल एंड के किसानों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।
ऐसे में नहरों के संचालन और पानी के समान वितरण में सुधार करना जरूरी है, ताकि सभी क्षेत्रों को निर्धारित मात्रा में सिंचाई का पानी मिल सके।
किसानों को मिल सकती है राहत
यदि नहर का पानी नियमित और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है तो किसानों की सिंचाई लागत कम हो सकती है। साथ ही भूजल पंप करने के लिए बिजली और डीजल पर होने वाला खर्च भी घट सकता है।
इसका सीधा फायदा उन क्षेत्रों को हो सकता है जहां भूजल तेजी से नीचे जा रहा है।
भूजल संरक्षण पर बढ़ता जोर
भूजल का संरक्षण कृषि और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ लंबे समय से फसल विविधीकरण, पानी की बचत करने वाली सिंचाई तकनीकों और सतही जल के बेहतर इस्तेमाल पर जोर देते रहे हैं।
नहर के पानी को टेल एंड तक पहुंचाना भी भूजल संरक्षण की इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
कुल मिलाकर, अध्ययन में सामने आया है कि नहर के पानी की बेहतर पहुंच और टेल एंड तक सिंचाई सुविधा मिलने से भूजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। पिछले दो वर्षों में अति-दोहन वाले भूजल ब्लॉकों की संख्या 115 से घटकर 110 होना इस दिशा में सकारात्मक संकेत है। हालांकि, भूजल संरक्षण के लिए लगातार और व्यापक प्रयासों की जरूरत बनी हुई है।
