27 अगस्त 2026: पंजाब के प्रमुख जलाशयों भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर बांधों में इस मानसून पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में कम बना हुआ है। 27 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, तीनों जलाशयों में पानी का भंडारण और आवक पिछले साल की इसी अवधि से नीचे है। इससे मानसून समाप्त होने के करीब पहुंचने के साथ जल भंडारण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भाखड़ा बांध में 37 फीट से ज्यादा कम पानी
भाखड़ा जलाशय का जलस्तर 27 अगस्त को 1,634.22 फीट दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 1,671.49 फीट था। यानी इस बार जलस्तर करीब 37.27 फीट कम है।
भाखड़ा में लाइव स्टोरेज करीब 3.61 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) रहा और जलाशय लगभग 64 प्रतिशत भरा था। पिछले साल इसी दिन इसमें 5.25 BCM पानी और 93 प्रतिशत भंडारण था।
पानी की आवक भी आधी के करीब
भाखड़ा में 27 अगस्त को पानी की आवक करीब 30,452 क्यूसेक रही, जबकि पिछले साल इसी दिन 58,997 क्यूसेक पानी आया था।
21 मई से अब तक की संचयी आवक भी पिछले साल की तुलना में कम रही है। इससे संकेत मिलता है कि सतलुज के ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में इस मानसून पानी की आवक अपेक्षाकृत कमजोर रही।
पोंग और रणजीत सागर की स्थिति भी कमजोर
भाखड़ा के अलावा पोंग और रणजीत सागर बांधों में भी पिछले साल की तुलना में कम पानी दर्ज किया गया है। जुलाई के दौरान BBMB के आंकड़ों में भी इन जलाशयों में पानी की आवक पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम बताई गई थी।
जुलाई के अंत में भाखड़ा का जलस्तर 1,597.2 फीट था, जबकि पिछले दो दशकों का औसत 1,613.12 फीट रहा है। पोंग और रणजीत सागर में भी उस समय के 20-वर्षीय औसत से नीचे जलस्तर दर्ज किया गया था।
सिंचाई और बिजली पर पड़ सकता है असर
भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर जलाशय पंजाब समेत पड़ोसी राज्यों के लिए सिंचाई और जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनसे मिलने वाला पानी कृषि जरूरतों के साथ-साथ जलविद्युत उत्पादन के लिए भी इस्तेमाल होता है।
ऐसे में अगर मानसून के अंतिम चरण में पर्याप्त पानी की आवक नहीं होती है, तो आने वाले महीनों में जल प्रबंधन को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
मानसून खत्म होने से पहले बारिश पर नजर
जलाशयों के लिए मानसून का अंतिम चरण महत्वपूर्ण है। अधिकारियों की नजर अब हिमाचल प्रदेश और आसपास के कैचमेंट क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर है। अगर अच्छी बारिश होती है तो जलाशयों में अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है और मौजूदा कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।
वहीं, कमजोर बारिश जारी रहने पर जलाशयों का भंडारण पिछले साल के मुकाबले कम ही रह सकता है।
पिछले साल की स्थिति से बड़ा अंतर
2025 में मानसून के दौरान पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर जैसे जलाशयों में पानी का स्तर काफी बढ़ गया था। इस साल स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है और जलाशयों में पर्याप्त खाली क्षमता बनी हुई है।
कुल मिलाकर, 2026 के मानसून में पंजाब के प्रमुख जलाशय भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर पिछले साल की तुलना में कम जलस्तर और कमजोर आवक दर्ज कर रहे हैं। अब मानसून के अंतिम दिनों में होने वाली बारिश यह तय करेगी कि इन जलाशयों में पानी का भंडारण कितना बढ़ पाता है।
