26 अगस्त 2026 दिल्ली में 31 वर्षीय MSc (Physics) छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद संस्थान में छात्रों पर बढ़ते मानसिक और अकादमिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह संस्थान में 2023 के बाद से आठवीं छात्र मौत बताई गई है। छात्रों के अनुसार, किसी छात्र के संकट में पहुंचने के पीछे आमतौर पर कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि कई तरह के दबाव एक साथ बढ़ सकते हैं।
सिर्फ परीक्षा का दबाव नहीं
IIT दिल्ली में छात्रों पर दबाव केवल परीक्षा या असाइनमेंट की डेडलाइन तक सीमित नहीं है। छात्रों ने अकादमिक प्रतिस्पर्धा, रिसर्च का तनाव, प्रशासनिक परेशानियां, अकेलापन और परिवार की अपेक्षाओं को भी महत्वपूर्ण कारक बताया है। कई बार ये सभी दबाव एक साथ सामने आते हैं और पहले से परेशान छात्र के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है।
प्रतिस्पर्धा और ग्रेडिंग का दबाव
छात्रों ने बताया कि प्रतिस्पर्धी माहौल में लगातार साथियों से तुलना मानसिक दबाव बढ़ा सकती है। रिलेटिव ग्रेडिंग और क्रेडिट खोने का डर किसी छोटी अकादमिक असफलता को भी बड़ा झटका बना सकता है।
एक तीसरे वर्ष के छात्र ने बताया कि लगातार यह देखना कि दूसरे छात्र कितना अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, थका देने वाला हो सकता है।
रिसर्च छात्रों के सामने अलग चुनौती
पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टोरल छात्रों के लिए रिसर्च का दबाव एक अलग चुनौती है। छात्रों के मुताबिक, उनका अकादमिक भविष्य काफी हद तक उनके सुपरवाइजर के साथ कामकाजी संबंधों पर निर्भर करता है।
ऐसी स्थिति में कुछ छात्र किसी समस्या या असहमति की शिकायत करने से भी हिचक सकते हैं, क्योंकि उन्हें अपने रिसर्च या डिग्री पर असर पड़ने की चिंता रहती है।
मेडिकल लीव के बाद वापसी भी आसान नहीं
किसी छात्र को मुश्किल दौर में मेडिकल लीव लेने या पढ़ाई से कुछ समय दूर रहने के बाद वापस लौटना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छात्रों के अनुसार, वापसी के दौरान हॉस्टल, अनुमति, छूटे हुए अकादमिक काम और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से एक साथ निपटना पड़ सकता है।
जब कोई छात्र पहले से मुश्किल स्थिति से उबर रहा हो, तो ये अतिरिक्त जिम्मेदारियां दबाव को और बढ़ा सकती हैं।
परिवार की उम्मीदें भी बनती हैं दबाव
कई छात्रों पर परिवार की उम्मीदों का भी दबाव रहता है। IIT जैसे संस्थान तक पहुंचने के लिए परिवार द्वारा किए गए वर्षों के प्रयास, आर्थिक निवेश और बेहतर भविष्य की उम्मीदों के कारण कुछ छात्र अपनी परेशानी परिवार के साथ साझा करने में संकोच कर सकते हैं।
एक छात्र के अनुसार, परिवार को चिंता में डालने के डर से कई बार छात्र अपनी परेशानियां अपने तक ही रखते हैं।
एक ही कारण से नहीं समझी जा सकती ऐसी स्थिति
छात्रों का कहना है कि किसी आत्महत्या को केवल एक कारण से जोड़कर देखना सही नहीं है। अकादमिक कठिनाइयों के साथ व्यक्तिगत समस्याएं, आर्थिक चिंताएं, अकेलापन और संस्थागत परेशानियां भी अलग-अलग छात्रों को अलग तरह से प्रभावित कर सकती हैं।
छात्रों ने बेहतर सहायता व्यवस्था की मांग की
ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों ने इन मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। छात्रों की मांग है कि संस्थान में मजबूत सपोर्ट सिस्टम, आसानी से उपलब्ध सहायता, बेहतर शिकायत निवारण व्यवस्था और मुश्किल दौर से गुजर रहे छात्रों के प्रति अधिक संवेदनशीलता सुनिश्चित की जाए।
संस्थान के सामने बड़ी चुनौती
IIT दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अकादमिक उत्कृष्टता महत्वपूर्ण है, लेकिन छात्रों के अनुसार इसके साथ ऐसा वातावरण भी जरूरी है जहां वे बिना डर अपनी समस्याएं साझा कर सकें और जरूरत पड़ने पर समय पर मदद हासिल कर सकें।
कुल मिलाकर, IIT दिल्ली में छात्र की हालिया मौत ने संस्थान में छात्रों पर पड़ने वाले बहुआयामी दबाव को फिर सामने ला दिया है। छात्रों के अनुसार अकादमिक प्रतिस्पर्धा, रिसर्च, प्रशासनिक दिक्कतें, अकेलापन और पारिवारिक अपेक्षाएं मिलकर मुश्किल स्थिति पैदा कर सकती हैं। अब छात्र बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, शिकायत व्यवस्था और संवेदनशील संस्थागत माहौल की मांग कर रहे हैं।
