25 अगस्त 2026 पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द से जल्द पूरी तरह कार्यात्मक बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती पर जोर
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल अस्पताल की इमारत और बुनियादी ढांचा तैयार कर देना पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों को वास्तव में चालू करने के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टर, मेडिकल अधिकारी और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति जरूरी है।
अदालत ने उम्मीद जताई कि दोनों राज्य आवश्यक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी करेंगे, ताकि मरीजों को सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
पंजाब में ICU और क्रिटिकल केयर सुविधाओं की स्थिति
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि मोगा, रोपड़ और मालेरकोटला में ICU लगभग दो सप्ताह के भीतर चालू होने की संभावना है।
वहीं, फिरोजपुर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण अंतिम चरण में बताया गया और इसे लगभग छह सप्ताह में चालू किए जाने की उम्मीद जताई गई।
सभी जिलों की स्वास्थ्य सुविधाओं का मांगा अपडेट
हाईकोर्ट ने पंजाब के मेडिकल हेल्थ सचिव को सभी जिलों में ICU की मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।
इसी तरह हरियाणा के मेडिकल हेल्थ सचिव को भी राज्य के सभी जिला अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की मौजूदा स्थिति बताने वाला हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।
पेड़ हटाने पर अदालत के आदेश से रुका निर्माण
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ निर्माण कार्य अदालत के रोक आदेश के कारण प्रभावित हुए हैं। कुछ स्थानों पर खड़े पेड़ों को हटाने की अनुमति नहीं मिलने से निर्माण कार्य रुका हुआ है।
अदालत ने ऐसे सभी मामलों की जानकारी भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्वास्थ्य सुविधाओं को चालू करने में कौन-कौन सी अड़चनें सामने आ रही हैं।
मालेरकोटला अस्पताल के मामले से शुरू हुई सुनवाई
यह मामला भिशम किंगर द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और उनके संचालन को लेकर सवाल उठाए गए थे।
इससे पहले हाईकोर्ट ने मालेरकोटला सिविल अस्पताल में CT स्कैन और MRI जैसी सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि आधुनिक समय में ये सुविधाएं जिला और उपमंडल स्तर के अस्पतालों में उपलब्ध होनी चाहिए।
1 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों को स्वास्थ्य सुविधाओं की मौजूदा स्थिति से संबंधित जानकारी रिकॉर्ड पर रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी।
कुल मिलाकर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों राज्य सरकारों को सरकारी अस्पतालों को जल्द से जल्द पूरी तरह चालू करने और डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की आवश्यक भर्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा कि नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
