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नियुक्ति विवाद के बीच बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ने रेजिडेंट डॉक्टरों को जारी रखने की अनुमति दी

22 अगस्त 2026 : बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) में नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच विश्वविद्यालय ने रेजिडेंट डॉक्टरों को फिलहाल अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति दी है। विश्वविद्यालय ने यह फैसला मरीजों की देखभाल और जरूरी व आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए लिया है।

मरीजों की देखभाल को प्राथमिकता

विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि डॉक्टरों को काम जारी रखने की अनुमति “मरीजों के हित और आवश्यक/आपातकालीन सेवाओं की निरंतरता” को ध्यान में रखते हुए दी गई है। इससे अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बनी रहेगी और मरीजों के इलाज पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा।

200 से अधिक नियुक्तियों पर विवाद

BFUHS में हाल ही में 200 से अधिक नए कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर सवाल उठे हैं। यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट ने इन नियुक्तियों पर आपत्ति जताते हुए मामले की केस-बाय-केस समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया है। आरोप है कि कुछ नियुक्तियां स्वीकृत पदों या बजट मंजूरी के बिना की गईं।

इसके अलावा करीब 25 डॉक्टरों को उनके मूल विभागों में वापस भेजे जाने का मामला भी सामने आया है। इन डॉक्टरों को गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सामान्य पूल में प्रमोशन दिया गया था।

पूर्व VC पर नियुक्तियों को लेकर आरोप

नियुक्तियों का यह विवाद विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है। बोर्ड ने कुछ नियुक्तियों को विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप नहीं होने की बात कही है।

हालांकि, डॉ. सूद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बोर्ड की कार्रवाई को गलत बताया है। उनका कहना है कि संबंधित पदों को बोर्ड की मंजूरी प्राप्त थी और नियुक्ति पत्र पर अधिकृत सदस्यों के हस्ताक्षर भी थे।

कांग्रेस विधायक ने लगाए गंभीर आरोप

इसी बीच पूर्व शिक्षा मंत्री और कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने BFUHS में करीब ₹500 करोड़ की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने मशीनों की खरीद, निर्माण कार्य, भर्ती और वाइस चांसलर की नियुक्ति समेत कई मामलों में जांच की मांग की है।

परगट सिंह ने दावा किया कि विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर विधानसभा में मुद्दा उठाने के बाद 200 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, डॉ. सूद ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

आगे होगी नियुक्तियों की समीक्षा

विश्वविद्यालय का बोर्ड नियुक्तियों की वैधता और नियमों के पालन की जांच कर रहा है। प्रभावित कर्मचारियों और उम्मीदवारों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। इसके बाद प्रत्येक मामले के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

फिलहाल रेजिडेंट डॉक्टरों को सेवाएं जारी रखने की अनुमति दिए जाने से अस्पतालों में मरीजों के इलाज और आपातकालीन सेवाओं में किसी तरह की बाधा आने से रोकने की कोशिश की गई है।

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