21 अगस्त 2026 : वर्दी, अनुशासन और पुलिस की कठिन जिम्मेदारियों के पीछे खेल प्रतिभाओं की एक समृद्ध कहानी भी छिपी है। पूर्व पंजाब पुलिस महानिदेशक (DGP) राजदीप सिंह गिल की पुस्तक ‘Ever Onwards’ इसी खेल विरासत को सामने लाती है। पुस्तक में 1951 से 2010 तक के ऑल इंडिया पुलिस गेम्स के छह दशकों के सफर, पुलिसकर्मियों की खेल उपलब्धियों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके योगदान को दर्ज किया गया है।
1951 में हुई थी ऑल इंडिया पुलिस गेम्स की शुरुआत
पुस्तक के अनुसार, ऑल इंडिया पुलिस गेम्स की शुरुआत 1951 में केवल एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के साथ हुई थी। समय के साथ इन खेलों का विस्तार होता गया और वर्ष 2010 तक 28 पुलिस संगठनों के खिलाड़ी पुरुषों और महिलाओं की 17 खेल विधाओं में हिस्सा लेने लगे थे।
राजदीप सिंह गिल ने अपनी पुस्तक में इन खेलों के विकास को छह दशकों की यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका उद्देश्य उन पुलिस खिलाड़ियों की उपलब्धियों को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखना है, जिनकी मेहनत और उपलब्धियां समय के साथ लोगों की यादों से गायब हो सकती थीं।
‘Ever Onwards’ में दर्ज है खिलाड़ियों का इतिहास
‘Ever Onwards’ को ऑल इंडिया पुलिस गेम्स पर पहली व्यापक पुस्तक बताया गया है। इसमें 1951 से 2010 तक के परिणाम, शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की जीवनियां, विभिन्न प्रतियोगिताओं की तस्वीरें, प्रमुख टीमों और बेहतरीन खिलाड़ियों की जानकारी शामिल की गई है। महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स को भी पुस्तक में विशेष स्थान दिया गया है।
गिल ने पुस्तक में कुछ ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट की प्रतियोगिताओं को भी शामिल किया है। इनमें घुड़सवारी और शूटिंग जैसी खेल विधाएं शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस के पर्वतारोहियों की जीवनियां भी पुस्तक का हिस्सा हैं।
खेल और पुलिसिंग के बीच गहरा संबंध
राजदीप सिंह गिल ने खेलों और पुलिस सेवा के बीच मजबूत संबंध पर भी जोर दिया है। उनके अनुसार, फिटनेस, अनुशासन, दृढ़ संकल्प, टीमवर्क और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता खेल और पुलिसिंग दोनों में महत्वपूर्ण हैं।
पुलिसकर्मी जब मैदान पर खेलता है तो वह टीमवर्क, नेतृत्व और हार न मानने की भावना सीखता है। ये गुण बाद में ड्यूटी के दौरान भी उसके काम आते हैं।
10 साल की मेहनत से तैयार हुई पुस्तक
इस पुस्तक को तैयार करना आसान काम नहीं था। गिल के अनुसार, ऑल इंडिया पुलिस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड, राज्य पुलिस या केंद्रीय पुलिस बलों के पास इस पूरे इतिहास का एक जगह संकलित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
इसलिए आवश्यक जानकारी और तस्वीरें जुटाने के लिए राज्य और केंद्रीय खेल कार्यालयों, समाचार पत्रों, पुस्तकालयों, सेवानिवृत्त खिलाड़ियों, पुस्तकों और पत्रिकाओं की मदद ली गई। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 10 वर्ष लगे।
गिल ने पुस्तक तैयार करने में अपने सहयोगी मोहिंदर सिंह के योगदान के लिए विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। इसके अलावा पूर्व DSP लखवीर सिंह, पूर्व इंस्पेक्टर इंदरवीर शर्मा और पंजाब पुलिस के कई सेवानिवृत्त व सेवारत खिलाड़ियों ने भी जानकारी और तस्वीरें जुटाने में सहयोग दिया।
पंजाब पुलिस की खेल विरासत को भी प्रमुखता
पुस्तक के विमोचन के अवसर पर पूर्व DGP एमएस भुल्लर और PAP के ADGP एमएफ फारूकी समेत कई पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ-साथ पंजाब पुलिस, BSF और CRPF से जुड़े खेल सितारे भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
एमएस भुल्लर ने राजदीप सिंह गिल की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पंजाब पुलिस अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जानी जाती है, लेकिन उसके खेलों ने भी उसे एक अलग पहचान दी है।
एमएफ फारूकी ने पंजाब पुलिस की खेल परंपरा में एमएस भुल्लर और राजदीप सिंह गिल के योगदान को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पंजाब पुलिस के खिलाड़ियों ने हाल में अमेरिका में आयोजित वर्ल्ड पुलिस गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया था।
खिलाड़ियों की उपलब्धियों को स्थायी रिकॉर्ड देने की कोशिश
‘Ever Onwards’ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि यह उन पुलिस खिलाड़ियों की उपलब्धियों को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित करती है, जिनके रिकॉर्ड अलग-अलग जगहों पर बिखरे हुए थे। पुस्तक के माध्यम से उनके प्रदर्शन, रिकॉर्ड और संघर्षों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
राजदीप सिंह गिल की यह पहल पुलिस खेलों के इतिहास को केवल प्रतियोगिताओं के परिणामों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि यह दिखाती है कि खेलों ने पुलिस बल में अनुशासन, फिटनेस, टीम भावना और राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करने में किस तरह योगदान दिया।
