20 अगस्त 2026 : ISKCON से जुड़े डॉ. सूरदास के एक बयान ने सोशल मीडिया और धार्मिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ने वाले व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु नहीं होती। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को भी भगवद्गीता की एक प्रति भेंट की थी और संभव है कि उन्होंने उसे पढ़ा हो।
डॉ. सूरदास ने क्या दावा किया?
डॉ. सूरदास ने कथित तौर पर भगवद्गीता के आध्यात्मिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि गीता का अध्ययन करने वाले व्यक्ति को दुर्घटना में मृत्यु का सामना नहीं करना पड़ता। उनके इस दावे को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
हालांकि, दुर्घटना में मृत्यु या उससे बचाव को भगवद्गीता पढ़ने से जोड़ने वाले इस दावे का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का जोखिम वाहन की गति, सुरक्षा उपायों, सड़क की स्थिति, चालक के व्यवहार और अन्य कई कारकों पर निर्भर करता है।
अजित पवार को भी दी थी भगवद्गीता
डॉ. सूरदास ने बताया कि उन्होंने अजित पवार को भगवद्गीता की किताब भेंट की थी। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि पवार ने पुस्तक पढ़ी हो।
अजित पवार को भगवद्गीता भेंट किए जाने की बात सामने आने के बाद यह बयान और चर्चा में आ गया है।
धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक दावे में अंतर
भगवद्गीता हिंदू धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक ग्रंथों में से एक है और करोड़ों लोग इसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए पढ़ते हैं। गीता में जीवन, कर्म, कर्तव्य और आत्मज्ञान से जुड़े विचार दिए गए हैं।
लेकिन किसी धार्मिक ग्रंथ के अध्ययन से दुर्घटना में मृत्यु को निश्चित रूप से रोका जा सकता है, ऐसा दावा वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। इसलिए इस बयान को धार्मिक आस्था से जुड़े व्यक्तिगत विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि चिकित्सकीय या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में।
कुल मिलाकर, ISKCON के डॉ. सूरदास का भगवद्गीता पढ़ने और दुर्घटना में मृत्यु न होने को लेकर किया गया दावा चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अजित पवार को भगवद्गीता की प्रति दी थी और संभव है कि उन्होंने उसे पढ़ा हो।
