5 अगस्त, 2026 : पंजाब में स्मॉल हाइव बीटल (Small Hive Beetle) के खतरे ने मधुमक्खी पालन (बी-कीपिंग) क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कीट मधुमक्खियों की कॉलोनियों को नुकसान पहुंचाकर शहद उत्पादन और परागण गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
कृषि एवं मधुमक्खी पालन विशेषज्ञों के अनुसार, स्मॉल हाइव बीटल छत्तों में प्रवेश कर शहद, पराग और मधुमक्खियों के लार्वा को नुकसान पहुंचाता है। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो इससे मधुमक्खी कॉलोनियों की संख्या में गिरावट आ सकती है।
शहद उत्पादन पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कीट के फैलने से शहद उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सतर्क रहने की सलाह
विभाग ने मधुमक्खी पालकों को नियमित रूप से छत्तों का निरीक्षण करने, संदिग्ध संक्रमण की सूचना संबंधित अधिकारियों को देने और वैज्ञानिक तरीकों से कीट नियंत्रण अपनाने की सलाह दी है।
परागण व्यवस्था भी हो सकती है प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमक्खियां कृषि फसलों के परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए कॉलोनियों की सुरक्षा केवल शहद उत्पादन ही नहीं, बल्कि कृषि उत्पादकता के लिए भी आवश्यक है।
