29 जुलाई,2026 मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच, जहां पढ़ने की आदत लगातार कम होती जा रही है, वहीं अमृतसर के एक लेखक ने लोगों, खासकर युवाओं में पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को फिर से जीवित करने का अभियान शुरू किया है। उनकी पहल को पाठकों और साहित्य प्रेमियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
लेखक का मानना है कि किताबें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, कल्पनाशक्ति और विचार क्षमता को भी समृद्ध बनाती हैं। इसी उद्देश्य से वे विभिन्न कार्यक्रमों, पुस्तक चर्चाओं और पाठक संवादों के माध्यम से लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
युवाओं को पुस्तकों से जोड़ने की पहल
लेखक स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक मंचों पर जाकर विद्यार्थियों से संवाद करते हैं तथा उन्हें नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यम उपयोगी है, लेकिन पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता।
साहित्य के प्रति बढ़ रही रुचि
इस पहल से जुड़े पाठकों का कहना है कि पुस्तक चर्चा और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से उनमें पढ़ने की नई रुचि विकसित हुई है। कई युवा अब अपने खाली समय में मोबाइल की बजाय किताबों को प्राथमिकता देने लगे हैं।
पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा
लेखक का उद्देश्य समाज में पढ़ने की आदत को मजबूत करना और नई पीढ़ी को साहित्य, इतिहास, विज्ञान और प्रेरणादायक पुस्तकों से जोड़ना है। उनका मानना है कि पढ़ने की संस्कृति मजबूत होने से समाज में सकारात्मक सोच और बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
