18 जुलाई 2026 सुप्रीम कोर्ट ने मरीजों के उपचार में कथित लापरवाही से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दो निजी अस्पतालों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यदि आप अपना कर्तव्य नहीं निभा सकते, तो अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ लिखने का कोई अधिकार नहीं है।”
सुनवाई के दौरान अदालत ने चिकित्सकीय पेशे की जिम्मेदारी और नैतिकता पर जोर देते हुए कहा कि डॉक्टरों का पहला दायित्व मरीज की जान बचाना और समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराना है। न्यायालय ने कहा कि चिकित्सा पेशा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों निजी अस्पतालों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि किसी मरीज को समय पर इलाज नहीं मिलता या अस्पताल अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करते, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
न्यायालय ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। साथ ही यह भी कहा कि मरीजों के अधिकारों और जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
मामले की सुनवाई अभी जारी है और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अस्पतालों तथा पक्षकारों को आगे की कार्यवाही के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं।
