15 जुलाई 2026 : सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी में खुलासा हुआ है कि हरियाणा के पिंजौर-मोर्नी क्षेत्र में पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग 3,000 पेड़ों की कटाई की गई। इस जानकारी के सामने आने के बाद पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र के प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पेड़ों की कटाई विभिन्न विकास कार्यों, सड़क परियोजनाओं तथा अन्य प्रशासनिक कारणों से की गई। हालांकि, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और स्थानीय नागरिकों ने इतने बड़े पैमाने पर हुई कटाई को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और संरक्षण उपाय जरूरी हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पिंजौर-मोर्नी क्षेत्र जैव विविधता और हरित आवरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि पेड़ों की कटाई की जाती है तो उसके बदले पर्याप्त संख्या में पौधे लगाना और उनकी देखभाल सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
वहीं, संबंधित विभागों का कहना है कि जहां भी आवश्यक हुआ है, वहां नियमानुसार अनुमति लेकर ही पेड़ों की कटाई की गई है। साथ ही क्षतिपूरक वृक्षारोपण (Compensatory Afforestation) की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसकी प्रभावी निगरानी और पारदर्शिता की मांग की है।
