7 जुलाई 2026 : देश के कई स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षण प्रणाली का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस तकनीक के जरिए अब सभी विद्यार्थियों को एक जैसी पढ़ाई कराने के बजाय उनकी सीखने की क्षमता और जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक कक्षा में सभी छात्रों को समान गति और एक जैसी सामग्री के साथ पढ़ाया जाता है। वहीं, AI आधारित प्लेटफॉर्म प्रत्येक विद्यार्थी के प्रदर्शन, समझ और सीखने की गति का विश्लेषण कर उसके लिए अलग-अलग अभ्यास, प्रश्न और अध्ययन सामग्री तैयार करते हैं।
नई तकनीक विद्यार्थियों की पढ़ने, लिखने, सुनने और बोलने की क्षमता का लगातार आकलन करती है। यदि किसी छात्र को किसी विषय में कठिनाई होती है, तो AI उसी विषय पर अतिरिक्त अभ्यास और मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है। वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उन्नत स्तर की सामग्री दी जाती है।
शिक्षकों का कहना है कि AI उनका विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी उपकरण है। इसकी मदद से वे प्रत्येक छात्र की प्रगति पर नजर रख सकते हैं और जिन विद्यार्थियों को अधिक सहायता की जरूरत होती है, उन्हें समय पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन दे सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित शिक्षा से छात्रों में भाषा सीखने की गति और आत्मविश्वास दोनों बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता, शिक्षकों का प्रशिक्षण और सभी छात्रों की तकनीक तक समान पहुंच सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
