23 जून 2026 : Delhi High Court ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा किए जाने वाले ऑडिट के रास्ते को हरी झंडी दे दी है। अदालत ने इस मामले में दायर चुनौती को समय से पहले (Premature) बताते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
मामला बिजली वितरण कंपनियों के खातों और कार्यप्रणाली की जांच से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने CAG ऑडिट प्रक्रिया को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने माना कि इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं है और प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।
अदालत के निर्णय के बाद अब CAG ऑडिट से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने का मार्ग साफ हो गया है। इस फैसले को सार्वजनिक संसाधनों और सेवाओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑडिट प्रक्रिया का उद्देश्य वित्तीय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की समीक्षा करना होता है। इससे संबंधित संस्थाओं की कार्यकुशलता और जवाबदेही का मूल्यांकन करने में मदद मिलती है।
दूसरी ओर, बिजली वितरण क्षेत्र से जुड़े पक्ष इस फैसले के कानूनी और प्रशासनिक प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। आने वाले समय में ऑडिट प्रक्रिया के दौरान विभिन्न मुद्दों पर और स्पष्टता सामने आ सकती है।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद डिस्कॉम के CAG ऑडिट की दिशा में आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल गया है, जबकि मामले से जुड़े पक्ष आगे की कानूनी रणनीति पर विचार कर सकते हैं।
