23 जून 2026 : विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म तेजी से ऐसे अपराधियों के लिए संभावित माध्यम बनते जा रहे हैं, जो बच्चों और किशोरों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। इंटरनेट और मल्टीप्लेयर गेम्स की बढ़ती लोकप्रियता के साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
साइबर सुरक्षा और बाल संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि कई ऑनलाइन गेम्स में चैट, वॉयस कम्युनिकेशन और सोशल इंटरैक्शन जैसी सुविधाएं होती हैं। इनका दुरुपयोग कर कुछ लोग बच्चों से संपर्क स्थापित करने और उनका विश्वास जीतने की कोशिश कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधी अक्सर दोस्ती, उपहार, इन-गेम रिवॉर्ड या अन्य प्रलोभनों के जरिए बच्चों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। कुछ मामलों में वे व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने या बच्चों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में फंसाने की कोशिश भी कर सकते हैं।
अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर उचित नजर रखें, गोपनीयता सेटिंग्स का उपयोग करें और उन्हें इंटरनेट सुरक्षा के बारे में जागरूक बनाएं। बच्चों को यह सिखाना भी जरूरी है कि वे किसी अजनबी के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
शिक्षकों और विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा संबंधी शिक्षा आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों को यह समझाना आवश्यक है कि ऑनलाइन दुनिया में भी सावधानी उतनी ही जरूरी है जितनी वास्तविक जीवन में।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऑनलाइन गेमिंग स्वयं में नकारात्मक नहीं है, लेकिन सुरक्षित उपयोग और जागरूकता बेहद जरूरी है। सही मार्गदर्शन, अभिभावकीय निगरानी और सुरक्षा उपायों के जरिए बच्चों को संभावित जोखिमों से बचाया जा सकता है।
