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हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और FAO-बैंकॉक ने जलवायु-लचीली कृषि को बढ़ावा देने के लिए किया समझौता, किसानों को मिलेगी नई तकनीकों की मदद

19 जून 2026 :  Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University (एचएयू) और Food and Agriculture Organization (FAO) के बैंकॉक कार्यालय के बीच जलवायु-लचीली (क्लाइमेट-रेजिलिएंट) कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस साझेदारी का उद्देश्य बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों के बीच किसानों को टिकाऊ खेती के लिए बेहतर समाधान उपलब्ध कराना है।

समझौते के तहत दोनों संस्थान कृषि अनुसंधान, तकनीकी सहयोग, ज्ञान साझा करने और आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रसार पर मिलकर काम करेंगे। विशेष ध्यान ऐसी तकनीकों पर दिया जाएगा जो कम पानी, बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा जैसी परिस्थितियों में भी किसानों की उत्पादकता बनाए रखने में मदद करें।

Hisar स्थित एचएयू लंबे समय से कृषि अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। वहीं FAO वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा, कृषि विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कार्य करता है। दोनों संस्थाओं की यह साझेदारी किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आने वाली मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। तापमान में वृद्धि, अनिश्चित मानसून और जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव किसानों की आय और उत्पादन को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

इस समझौते के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम, शोध परियोजनाएं, क्षमता निर्माण और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रदर्शन जैसे कई कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं। इससे किसानों को नई जानकारी और बेहतर कृषि प्रबंधन के तरीके सीखने का अवसर मिलेगा।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सहयोग से न केवल हरियाणा बल्कि अन्य राज्यों के किसानों को भी लाभ मिल सकता है। नई तकनीकों और अनुसंधान आधारित समाधानों के जरिए कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।

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