4 जून 2026 : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ऑन-स्क्रीन उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन प्रणाली को लेकर पंजाब के कक्षा 12 के कुछ विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता देखी जा रही है। छात्रों का मानना है कि नई मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त जानकारी और पारदर्शिता की आवश्यकता है।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के तहत परीक्षकों को उत्तरपुस्तिकाओं की डिजिटल प्रतियां उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनका मूल्यांकन कंप्यूटर स्क्रीन पर किया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, तेज और मानकीकृत बनाना है।
हालांकि, कुछ छात्रों को आशंका है कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान उत्तरों की प्रस्तुति, आरेखों या हस्तलिखित सामग्री की स्पष्टता जैसे पहलुओं का प्रभाव उनके अंकों पर पड़ सकता है। इन चिंताओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है।
शिक्षा के विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणालियां दुनिया के कई हिस्सों में उपयोग की जा रही हैं और इनका उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को कम करना तथा मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी प्रणालियों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उत्तरपुस्तिकाओं का डिजिटलीकरण कितनी गुणवत्ता से किया गया है और परीक्षकों को प्रणाली के उपयोग का कितना प्रशिक्षण दिया गया है।
शैक्षिक प्रौद्योगिकी के जानकारों का मानना है कि नई तकनीकों को अपनाने के दौरान छात्रों और अभिभावकों की शंकाओं का समाधान करना भी महत्वपूर्ण होता है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया पर विश्वास बढ़ता है।
सीबीएसई का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन का उद्देश्य निष्पक्षता और दक्षता को बढ़ाना है। बोर्ड समय-समय पर मूल्यांकन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी सुधार और मानक प्रक्रियाओं को लागू करता रहा है।
फिलहाल, छात्रों और अभिभावकों की ओर से उठाई जा रही चिंताओं पर चर्चा जारी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट संवाद और पारदर्शिता से ऐसी आशंकाओं को दूर किया जा सकता है।
