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हरियाणा में 20 वर्षों में सूचना आयोग पर 113 करोड़ खर्च, आरटीआई जागरूकता उपेक्षित

2 जून 2026 :  हरियाणा में सूचना के अधिकार (RTI) व्यवस्था से जुड़े खर्चों को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में राज्य के सूचना आयोग के संचालन और प्रशासनिक कार्यों पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि आरटीआई जागरूकता कार्यक्रमों पर केवल लगभग 2.5 लाख रुपये खर्च हुए।

यह अंतर पारदर्शिता और नागरिक जागरूकता से जुड़े मुद्दों पर नई बहस को जन्म दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सूचना आयोग का सुचारू संचालन आवश्यक है, लेकिन नागरिकों को उनके सूचना अधिकारों के बारे में जागरूक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

लोक प्रशासन के विशेषज्ञों के अनुसार, आरटीआई कानून का उद्देश्य केवल सूचना उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना भी है। इसके लिए नागरिकों को अपने अधिकारों की जानकारी होना आवश्यक है।

जानकारों का मानना है कि यदि जागरूकता कार्यक्रमों पर पर्याप्त निवेश नहीं किया जाता, तो बड़ी संख्या में नागरिक सूचना के अधिकार का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाते।

कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि सूचना का अधिकार लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह नागरिकों को सरकारी कार्यों और निर्णयों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है।

विश्लेषकों के अनुसार, सूचना आयोगों पर होने वाला खर्च मुख्य रूप से कर्मचारियों के वेतन, कार्यालय संचालन, बुनियादी ढांचे और मामलों के निपटारे से संबंधित होता है। वहीं जागरूकता कार्यक्रमों के लिए अलग बजट और रणनीति की आवश्यकता होती है।

लोक नीति से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी अधिकार आधारित कानून की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आम नागरिक उसके बारे में कितना जानते हैं और उसका उपयोग करने में कितने सक्षम हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जनसंपर्क गतिविधियां आरटीआई के प्रभाव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए लागू किया गया था। कई राज्यों में समय-समय पर इसके प्रभाव और कार्यान्वयन की समीक्षा भी की जाती है।

यह मामला प्रशासनिक खर्च और जन-जागरूकता के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सूचना आयोगों के प्रभावी संचालन के साथ-साथ नागरिकों को आरटीआई के बारे में शिक्षित करना भी प्राथमिकता होनी चाहिए।

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