2 जून 2026 : लुधियाना में इस वर्ष समर कैंपों का स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। जहां पहले बच्चों के लिए मिट्टी कला (क्ले मॉडलिंग), नृत्य, चित्रकला और अन्य पारंपरिक गतिविधियां प्रमुख आकर्षण हुआ करती थीं, वहीं अब कोडिंग, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं।
शहर के कई शैक्षणिक संस्थानों और प्रशिक्षण केंद्रों ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों और किशोरों के लिए तकनीकी कौशल विकसित करने वाले विशेष कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को भविष्य की तकनीकों से परिचित कराना और शुरुआती स्तर पर डिजिटल कौशल विकसित करना है।
Artificial Intelligence से संबंधित कार्यशालाओं में बच्चों को मशीन लर्निंग की बुनियादी अवधारणाएं, एआई आधारित टूल्स का उपयोग और तकनीकी समस्याओं के समाधान के बारे में जानकारी दी जा रही है।
इसके साथ ही कोडिंग कक्षाओं में छात्रों को प्रोग्रामिंग की मूल बातें, गेम निर्माण, वेबसाइट विकास और तार्किक सोच से जुड़े अभ्यास कराए जा रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में समस्या समाधान क्षमता और रचनात्मकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कंप्यूटर विज्ञान के विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में कोडिंग और तकनीकी साक्षरता का महत्व लगातार बढ़ रहा है। प्रारंभिक अवस्था में इन कौशलों से परिचय छात्रों को भविष्य की शैक्षणिक और व्यावसायिक चुनौतियों के लिए बेहतर तैयार कर सकता है।
हालांकि, कुछ शिक्षाविद यह भी मानते हैं कि पारंपरिक रचनात्मक गतिविधियों का महत्व कम नहीं हुआ है। उनके अनुसार, कला, संगीत, नृत्य और खेल बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षा के विशेषज्ञों का कहना है कि आदर्श समर कैंप वह होगा जिसमें तकनीकी और रचनात्मक दोनों प्रकार की गतिविधियों का संतुलन हो।
अभिभावकों के बीच भी तकनीकी कौशलों को लेकर रुचि बढ़ी है। कई माता-पिता मानते हैं कि एआई, रोबोटिक्स और कोडिंग जैसी गतिविधियां बच्चों को भविष्य की रोजगार संभावनाओं और तकनीकी दुनिया को समझने में मदद कर सकती हैं।
शैक्षिक प्रौद्योगिकी के जानकारों का कहना है कि बच्चों को तकनीक का उपयोग केवल उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि निर्माता और नवप्रवर्तक के रूप में करना सिखाना महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में समर कैंपों और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में तकनीकी विषयों की भागीदारी और बढ़ सकती है।
पंजाब के अन्य शहरों में भी इसी तरह की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है, जहां आधुनिक तकनीकों को बच्चों की छुट्टियों के कार्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है।
यह बदलाव दर्शाता है कि शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है और नई पीढ़ी को भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करने पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
