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पंजाब राजनीति में महिलाओं का बढ़ता दबदबा, मोहाली निगम में मजबूत पकड़

मोहाली 31 मई 2026 : पंजाब की राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी और कद बढ़ने लगा है। इसका सटीक उदाहरण मोहाली नगर निगम चुनाव के नतीजों में भी देखने को मिला। यहां 50 वार्डों में से 27 में महिलाओं ने जीत दर्ज की है। यानी आधे से अधिक शहर में छोटी सरकार को महिला पार्षद चलाएंगी।

निगम चुनाव के लिए की गई वार्डबंदी के तहत 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई थीं। इनमें वार्ड नंबर 1, 3, 7, 9, 11, 13, 15, 19, 21, 23, 25, 27, 31, 33, 35, 37, 39, 41, 43, 45, 47 और 49 सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित थे।

वार्ड नंबर 5, 17 और 29 अनुसूचित जाति (एससी) महिला वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। इन 25 वार्डों से महिलाओं का पार्षद बनकर निगम सदन में पहुंचना तय था। हालांकि, महिलाओं ने केवल आरक्षित सीटों तक ही अपनी जीत सीमित नहीं रखी।

सामान्य श्रेणी के वार्ड नंबर 12 और 40 से भी महिला उम्मीदवारों ने चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ का परिचय दिया। इन दो अतिरिक्त वार्डों में जीत के कारण निगम सदन में महिला पार्षदों की संख्या 25 से बढ़कर 27 हो गई। निगम सदन में महिलाओं की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कि पुरुषों की 46 प्रतिशत हिस्सेदारी से अधिक है।

स्थानीय निकायों में बढ़ी महिलाओं की सक्रियता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम मोहाली में बदलती राजनीतिक सोच और महिला नेतृत्व के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय निकायों में महिलाओं की सक्रियता बढ़ी है और अब वे केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनावी मैदान में मजबूत दावेदारी पेश कर रही हैं। इस बार कई महिला उम्मीदवारों ने अपने बूते पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की है।

सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद

नए निगम सदन में महिलाओं की संख्या अधिक होने के कारण शहर के विकास से जुड़े कई सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, महिला सुरक्षा, पार्कों और सामुदायिक सुविधाओं के विकास जैसे विषयों पर महिला पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।

इसके अलावा शहर की विभिन्न कालोनियों और आवासीय क्षेत्रों से जुड़े जनहित के मुद्दों को भी महिला प्रतिनिधि प्रभावी ढंग से उठा सकती हैं।राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी का असर निगम की विभिन्न समितियों के गठन और उनकी कार्यप्रणाली पर भी देखने को मिलेगा। महिला पार्षदों की संख्या अधिक होने से निगम की नीतियों और फैसलों में उनकी आवाज पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।

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