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फेफड़ा और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ ने ई-सिगरेट के खतरों को लेकर चेतावनी दी

28 मई 2026 :  ई-सिगरेट और वेपिंग का बढ़ता चलन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। फेफड़ा और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वेपिंग को सुरक्षित विकल्प मानना गलत हो सकता है और इसके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, विशेष रूप से युवाओं और किशोरों के बीच वेपिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। आकर्षक फ्लेवर, आधुनिक डिजाइन और सोशल मीडिया प्रचार के कारण कई लोग इसे सामान्य धूम्रपान की तुलना में कम हानिकारक मानने लगे हैं।

फुफ्फुसीय चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ई-सिगरेट में मौजूद रसायन फेफड़ों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वेपिंग से सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों में सूजन, खांसी और गंभीर मामलों में फेफड़ों की क्षति जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

क्रिटिकल केयर मेडिसिन से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मामलों में ई-सिगरेट के कारण गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, जिनके लिए अस्पताल में भर्ती तक की जरूरत पड़ सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग यह मान लेते हैं कि ई-सिगरेट में तंबाकू धुएं जैसा खतरा नहीं होता, लेकिन इसके एरोसोल और रासायनिक तत्व शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

फेफड़ों की बीमारी से संबंधित शोधों में भी वेपिंग और श्वसन समस्याओं के बीच संबंधों पर लगातार अध्ययन किए जा रहे हैं।

भारत सहित कई देशों में ई-सिगरेट और वेपिंग उत्पादों को लेकर सख्त नियम और प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में निकोटीन की लत बढ़ने का खतरा भी वेपिंग के साथ जुड़ा हुआ है, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े जानकारों के अनुसार, जागरूकता अभियान और वैज्ञानिक जानकारी लोगों को वेपिंग के वास्तविक जोखिम समझाने में मदद कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टरों ने अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों से भी युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की अपील की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रकार के निकोटीन उत्पाद का सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है और इससे बचाव सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि आधुनिक जीवनशैली और सोशल मीडिया प्रभाव के बीच स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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