25 मई 2026 : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत पारसिक पहाड़ी के नीचे बनने वाली भूमिगत सुरंग (अंडरग्राउंड टनल) का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सुरंग निर्माण में इस्तेमाल होने वाला विशाल “कटरहेड” घणसोली शाफ्ट तक पहुंच चुका है, जिसे परियोजना में महत्वपूर्ण तकनीकी चरण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, यह सुरंग मुंबई महानगर क्षेत्र में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। परियोजना का उद्देश्य तेज, आधुनिक और उच्च क्षमता वाली रेल सेवा उपलब्ध कराना है।
घणसोली स्थित शाफ्ट तक कटरहेड पहुंचने के बाद अब सुरंग निर्माण की प्रक्रिया को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, टनल बोरिंग मशीन (TBM) का कटरहेड भूमिगत चट्टानों और मिट्टी को काटते हुए सुरंग तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है। यह अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का हिस्सा माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पारसिक पहाड़ी क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना को देखते हुए सुरंग निर्माण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण कार्य माना जा रहा है।
महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना को देश के सबसे बड़े बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है।
इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का कहना है कि भूमिगत सुरंग निर्माण में सुरक्षा, जल निकासी, कंपन नियंत्रण और भूगर्भीय स्थिरता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विकसित करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे यात्रा समय कम होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
हालांकि, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर पर्यावरणीय और लागत संबंधी बहस भी समय-समय पर सामने आती रही है।
सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र और पहाड़ी क्षेत्रों के आसपास भूमिगत सुरंग निर्माण अत्यधिक तकनीकी योजना और निगरानी की मांग करता है।
फिलहाल, परियोजना से जुड़े इंजीनियर और तकनीकी दल सुरंग निर्माण कार्य की प्रगति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। आने वाले समय में परियोजना के अन्य हिस्सों में भी निर्माण गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि भारत में आधुनिक परिवहन और हाई-स्पीड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है, जिनमें उन्नत तकनीक की बड़ी भूमिका है।
