25 मई 2026 :पंजाब में तेजी से गिरते भूजल स्तर को लेकर चिंता बढ़ने के बीच राज्य सरकार अब डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक को बड़े स्तर पर बढ़ावा दे रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पानी बचाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, पारंपरिक धान रोपाई पद्धति में खेतों को लंबे समय तक पानी से भरा रखना पड़ता है, जिससे भूजल का अत्यधिक उपयोग होता है। इसके विपरीत DSR तकनीक में धान की सीधे बुवाई की जाती है, जिससे पानी की खपत काफी कम हो सकती है।
पंजाब कृषि विभाग किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए प्रेरित कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पंजाब में धान-गेहूं फसल चक्र के कारण भूजल स्तर पर लगातार दबाव बढ़ा है। कई इलाकों में जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिसे भविष्य के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि DSR तकनीक से पानी की बचत के साथ-साथ मजदूरी लागत भी कम हो सकती है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
भारत में जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राज्यों में नई तकनीकों और वैकल्पिक खेती मॉडल पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि DSR तकनीक के सफल उपयोग के लिए किसानों को उचित प्रशिक्षण, खरपतवार नियंत्रण और समय पर तकनीकी सहायता की जरूरत होती है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने और DSR के तहत खेती का क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
पंजाब देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है और यहां कृषि अर्थव्यवस्था में धान की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भूजल संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में सिंचाई और पेयजल दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
फिलहाल, कृषि विभाग विभिन्न जिलों में DSR तकनीक के विस्तार पर काम कर रहा है। आने वाले समय में इसके परिणाम राज्य की कृषि नीति और जल संरक्षण रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि बदलते पर्यावरणीय हालात और जल संकट को देखते हुए टिकाऊ कृषि पद्धतियों की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।
