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रोहतक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने जैव विविधता संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी की अपील की

24 मई 2026 : रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) के एक प्रोफेसर ने जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) को बचाने के लिए सामुदायिक स्तर पर सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी योजनाओं या शैक्षणिक शोध से ही नहीं, बल्कि आम लोगों की भागीदारी से ही प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है।

एक पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण वन्यजीवों, पौधों और पारिस्थितिक तंत्र पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय असंतुलन और भी गंभीर हो सकता है।

उन्होंने छात्रों और स्थानीय समुदायों को प्रेरित करते हुए कहा कि पेड़ लगाना, जल स्रोतों की रक्षा करना और कचरे का सही प्रबंधन जैसे छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत पर उन्होंने बल दिया।

प्रोफेसर ने यह भी बताया कि हरियाणा जैसे राज्यों में कृषि भूमि, जंगलों और जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में स्थानीय समुदायों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे सीधे तौर पर पर्यावरण के संपर्क में रहते हैं और बदलाव की शुरुआत वहीं से हो सकती है।

कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों को उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘ग्रीन कैंपस’ पहल, वृक्षारोपण अभियान और जल संरक्षण परियोजनाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं, जहां से पर्यावरण चेतना पूरे समाज में फैल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैव विविधता केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के अस्तित्व के लिए भी जरूरी है। भोजन, पानी, स्वच्छ हवा और जलवायु संतुलन सभी जैव विविधता पर निर्भर करते हैं। इसलिए इसके संरक्षण के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक दायित्व है। यदि समुदाय, संस्थान और व्यक्ति मिलकर प्रयास करें, तो जैव विविधता को बचाया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

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