23 मई 2026 : लुधियाना में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर प्रशासन अब सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद लुधियाना नगर निगम ने इस मुद्दे से निपटने के लिए कार्रवाई तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों के हमलों और लोगों में बढ़ती चिंता को देखते हुए नगर निगम ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसमें कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और पहचान संबंधी कदम शामिल हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्यों और स्थानीय निकायों को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कानून और पशु कल्याण नियमों के तहत प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम अब विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर डॉग बाइट मामलों की निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कुत्तों को हटाना स्थायी समाधान नहीं माना जाता। नसबंदी, रेबीज टीकाकरण, कचरा प्रबंधन और पशु आश्रय जैसी व्यवस्थाएं लंबे समय के समाधान का हिस्सा होती हैं।
पंजाब के कई शहरों में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। शहरी क्षेत्रों में बढ़ते कचरे और अनियोजित प्रबंधन को भी इसकी एक वजह माना जाता है।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि समस्या का समाधान मानवीय और कानूनी दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। वहीं स्थानीय निवासी सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
भारत में पशु क्रूरता निवारण कानून और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के तहत आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश तय किए गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रेबीज जैसी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण और जनजागरूकता बेहद जरूरी है।
फिलहाल, नगर निगम की टीमें विभिन्न इलाकों में सर्वे और कार्रवाई में जुटी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए जाएंगे।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या अब सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक चुनौती के रूप में उभर रही है।
