21 मई 2026 : हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने लिंगानुपात विवाद के बीच चार डॉक्टरों के निलंबन के खिलाफ नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर पुनर्विचार की मांग की है। इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, राज्य में घटते लिंगानुपात को लेकर कार्रवाई करते हुए चार वरिष्ठ डॉक्टरों को निलंबित किया गया था। इसके बाद HCMSA ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना पूरी जांच के कठोर कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन का कहना है कि संबंधित डॉक्टरों को अपनी बात रखने और निष्पक्ष जांच का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि डॉक्टरों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से पहले सभी प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं की गहन जांच आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लिंगानुपात जैसे संवेदनशील मुद्दों में प्रशासनिक जवाबदेही के साथ-साथ निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन भी बेहद महत्वपूर्ण होता है।
हरियाणा में पिछले कुछ समय से लिंगानुपात को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच प्रक्रिया जरूरी है।
भारत में PCPNDT कानून के तहत भ्रूण लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सख्त नियम लागू हैं।
दूसरी ओर, सामाजिक संगठनों का कहना है कि घटते लिंगानुपात को गंभीरता से लेना जरूरी है और जिम्मेदारी तय करने के लिए प्रभावी कार्रवाई भी आवश्यक है।
फिलहाल, मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और डॉक्टर संगठनों के बीच चर्चा जारी है। आने वाले समय में सरकार की ओर से आगे की प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि संवेदनशील सामाजिक मुद्दों में प्रशासनिक कार्रवाई और निष्पक्ष जांच के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
