20 मई 2026 : हरियाणा में लिंगानुपात में आई तेज गिरावट के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए चार वरिष्ठ डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, राज्य में बेटियों के जन्म अनुपात में गिरावट को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी कर रहे थे। समीक्षा के दौरान कुछ क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक पाए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों और डॉक्टरों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि लिंगानुपात सुधारना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि घटता लिंगानुपात सामाजिक संतुलन और महिलाओं की स्थिति से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। लंबे समय से विभिन्न राज्यों में कन्या भ्रूण हत्या और लिंग चयन जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए अभियान चलाए जाते रहे हैं।
भारत में PCPNDT कानून के तहत भ्रूण लिंग जांच और लिंग चयन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस कानून का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या रोकना और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सूत्रों के अनुसार, निलंबित डॉक्टरों की भूमिका और संबंधित मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है। विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासनिक समीक्षा भी जारी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानसिकता में बदलाव भी लिंगानुपात सुधारने के लिए बेहद जरूरी है।
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में निगरानी, जागरूकता अभियान और स्वास्थ्य संस्थानों की जांच को भी तेज किया जा रहा है।
महिला अधिकार और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा और समानता सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि लिंगानुपात लगातार प्रभावित होता है तो इसका सामाजिक और जनसंख्या संतुलन पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगे भी निगरानी तथा कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि घटते लिंगानुपात को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती और सामाजिक जागरूकता दोनों की आवश्यकता है।
