19 मई 2026 : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पंजाब में डीलिस्टेड भूमि के सीमांकन से जुड़े मामले में पांच डिप्टी कमिश्नरों (DC) को नोटिस जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और पर्यावरणीय हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, मामला उन जमीनों से जुड़ा है जिन्हें पहले पर्यावरणीय या संरक्षित श्रेणी में माना जाता था, लेकिन बाद में डीलिस्ट किए जाने के बाद उनके सीमांकन और रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठे।
NGT ने संबंधित अधिकारियों से मामले में जवाब मांगा है और यह स्पष्ट करने को कहा है कि भूमि सीमांकन की प्रक्रिया किस प्रकार की गई और उसमें निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
पंजाब के विभिन्न जिलों से जुड़े इस मामले को पर्यावरण संरक्षण और भूमि प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूमि सीमांकन और पर्यावरणीय श्रेणियों से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और स्पष्ट रिकॉर्ड बेहद जरूरी होते हैं, क्योंकि इनका सीधा असर पर्यावरण, विकास परियोजनाओं और स्थानीय प्रशासन पर पड़ता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरणीय नियमों के पालन से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली प्रमुख संस्था है। ऐसे मामलों में अधिकरण समय-समय पर राज्यों और प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगता रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, मामले में जमीन के रिकॉर्ड, सीमांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमि रिकॉर्ड और सीमांकन प्रक्रियाएं स्पष्ट न हों तो भविष्य में कानूनी विवाद और पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ सकती हैं।
पंजाब में भूमि उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विस्तार से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर लोगों और सामाजिक संगठनों की नजर बनी हुई है। कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पारदर्शी जांच और जवाबदेही की मांग की है।
फिलहाल, संबंधित प्रशासनिक अधिकारी मामले में जवाब तैयार करने और आवश्यक दस्तावेज जुटाने में लगे हुए हैं। आने वाली सुनवाई में मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि पर्यावरणीय मामलों और भूमि प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक संस्थाएं लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
