16 मई 2026 : हरियाणा के यमुनानगर में कृषि विभाग द्वारा यूरिया की खपत में कमी लाने के प्रयासों से लगभग ₹123 करोड़ की बचत होने का दावा किया गया है।
जानकारी के अनुसार यह बचत बेहतर उर्वरक प्रबंधन, मृदा परीक्षण आधारित खेती और किसानों को संतुलित खाद उपयोग के लिए प्रेरित करने के कारण संभव हुई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक यूरिया उपयोग न केवल लागत बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और फसल उत्पादन पर भी दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक किसानों को नाइट्रोजन आधारित उर्वरक के साथ संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग के लिए जागरूक किया गया, जिससे अनावश्यक खपत में कमी आई।
योजनाओं के तहत फील्ड स्तर पर प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और कृषि सलाह सेवाओं को भी मजबूत किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीक और वैज्ञानिक खेती अपनाने से इनपुट लागत कम की जा सकती है और उत्पादन क्षमता भी बेहतर हो सकती है।
कुल मिलाकर यमुनानगर में यूरिया खपत घटाकर की गई यह बचत कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन और सतत खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।
