5 मई 2026 : हरियाणा में बच्चों के कुपोषण से निपटने के लिए एक अनोखी और पारंपरिक पहल शुरू की गई है। राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को ‘चूरमा’ और उबले हुए चने (boiled gram) देने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि उन्हें पोषक आहार मिल सके।
यह पहल खासतौर पर उन क्षेत्रों में लागू की जा रही है, जहां बच्चों में कुपोषण की समस्या अधिक देखी गई है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों का उपयोग करते हुए बच्चों को संतुलित आहार देने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘चूरमा’ (गेहूं, घी और गुड़ से बना) और उबले चने दोनों ही पोषण से भरपूर होते हैं। इनमें प्रोटीन, आयरन और ऊर्जा की पर्याप्त मात्रा होती है, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य बच्चों को स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन देना है, ताकि वे इसे आसानी से स्वीकार करें और नियमित रूप से खा सकें।
हरियाणा के कई जिलों में इस पहल के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिल रहे हैं और उनकी उपस्थिति भी आंगनवाड़ी केंद्रों में बढ़ी है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका इस योजना में बेहद महत्वपूर्ण है। वे बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराते हैं और उनके स्वास्थ्य पर नजर भी रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों का उपयोग कुपोषण से निपटने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है, क्योंकि यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध होता है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस पहल के साथ-साथ अन्य पोषण योजनाओं को भी मजबूत करने की जरूरत है, ताकि बच्चों को संतुलित आहार मिल सके।
हरियाणा सरकार का कहना है कि वह बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है और इस दिशा में लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल, यह पहल एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखी जा रही है और उम्मीद की जा रही है कि इससे कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सोच को मिलाकर बड़ी सामाजिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
