24 अप्रैल 2026 : राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच को लेकर महाराष्ट्र एटीएस और सीबीआई के पुराने साक्ष्यों को नजरअंदाज करने के आरोप सामने आए हैं।
मालेगांव ब्लास्ट मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए जांच की दिशा पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि विभिन्न जांच एजेंसियों के साक्ष्यों के बीच अंतर और नई कहानी पेश किए जाने को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
मामले में यह आरोप लगाया गया है कि एनआईए ने पूर्व में जुटाए गए साक्ष्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया और एक अलग दृष्टिकोण अपनाया।
अदालत की इस टिप्पणी के बाद जांच प्रक्रिया और एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बहस तेज हो गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सभी साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन आवश्यक होता है, ताकि न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
इस घटनाक्रम ने सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और जांच की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की आगे सुनवाई जारी है।
कुल मिलाकर मालेगांव ब्लास्ट मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ने जांच एजेंसियों की भूमिका और प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
