13 अप्रैल 2026 : मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना यात्रियों के लिए गेमचेंजर साबित होने वाली है। गहरी घाटियों पर बने जुड़वां पुल और सुरंगों की वजह से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के लिए एक वैकल्पिक मार्ग तैयार हो रहा है, जिससे ट्रैफिक जाम में काफी कमी आएगी। हालांकि, खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर इस परियोजना पर भी पड़ने की आशंका है, जिससे काम में देरी हो सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, डामरीकरण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे इसकी कीमतें 50% से अधिक बढ़ गई हैं। बिटुमेन की आपूर्ति मुख्य रूप से ईरान, इराक, सऊदी अरब, ओमान और कुवैत जैसे देशों से होती है। युद्ध की स्थिति के कारण सप्लाई बाधित हुई है। इसके अलावा मशीनों में इस्तेमाल होने वाले हल्के तेल की सप्लाई भी रुक गई है।
इस वजह से परियोजना के उद्घाटन में देरी की संभावना है। हालांकि ठेकेदारों को 25 अप्रैल तक काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और 30 अप्रैल तक लोड टेस्टिंग पूरी होनी है। योजना के अनुसार 1 मई को मार्ग खोलने की तैयारी है, लेकिन स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है।
यह मार्ग 13.3 किमी लंबा है, जिसमें 9 किमी का सुरंग मार्ग शामिल है, जो सीधे कुसगांव को जोड़ता है। इससे लोणावला-खंडाला घाट की ट्रैफिक समस्या काफी हद तक कम होगी।
