• Wed. Apr 8th, 2026

रजिस्ट्री के लिए नए नियम लागू, अब पहले करवानी होगी KYC

अमृतसर 08 अप्रैल 2026 : रजिस्ट्री दफ्तरों में सरगर्म लैंड माफिया के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एफ.सी.आर. (फाइनांस कमिश्नर रैवेन्यू) अनुराग वर्मा के आदेशानुसार जहां डी.सी. दलविन्दरजीत सिंह की तरफ से 8 जाली रजिस्ट्रियां करवाने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है तो वहीं रजिस्ट्री दफ्तरों में हाल ही में तैनात किए गए सब-रजिस्ट्रारों ने जिसमें सब-रजिस्ट्रार वन जसबीर सिंह संधू, सब-रजिस्ट्रार टू अभिषेक वर्मा और सब-रजिस्ट्रार विकास गुप्ता सहित, सब-रजिस्ट्रार करनबीर ढिल्लों की तरफ से सभी वसीका नवीसों को निर्देश दिए गए हैं कि रजिस्ट्री करवाने से पहले खरीदार और बेचने वालों के दस्तावेजों की ‘के.वाई.सी.’ जरूर करवाई जाए।

अधिकारियों ने कहा कि ईजी रजिस्ट्री के तहत माल विभाग की तरफ से ‘के.वाई.सी.’ को जल्द ही सबके लिए जरुरी कर दिया जाएगा, लेकिन फिर सभी वसीका नवीसों और रैवेन्यू से संबंधित वकीलों को दस्तावेजों की ‘के.वाई.सी.’ जरुर करवानी चाहिए, ताकि बार-बार सामने आने वाली जाली रजिस्ट्रियों पर लगाम लगाई जा सके। दूसरी तरफ वसीका नवीस यूनियन की तरफ से जिला प्रधान नरेश शर्मा ने भी आश्वासन दिया है कि यूनियन के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों की तरफ से ‘के.वाई.सी.’ को पहल के आधार पर किया जा रहा है, क्योंकि जब भी कोई जाली रजिस्ट्री का मामला पकड़ा जाता है तो इससे इमानदारी के साथ काम करने वाले वसीका नवीसों की भी बदनामी होती है।

‘के.वाई.सी.’ के पहले ही दिन पकड़ा गया था नकली अरमान 

जमीन जायदाद की रजिस्ट्री करवाते समय ‘के.वाई.सी.’ कितनी अहम बन जाती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस समय सरकार की तरफ से रजिस्ट्रियों के दस्तावेजों में ‘के.वाई.सी.’ को शुरू करवाया गया तो पहले ही दिन एक नाबालिग लड़के की जमीन की जाली रजिस्ट्री होने से बच गई, जिसका नाम अरमान था संबंधित वसीका नवीस ने जब तथाकथित अरमान के दस्तावेजों की के.वाई.सी. करवाई तो अरमान नकली निकला। मामला थाने तक भी पहुंच गया, लेकिन लैंडमाफिया ने अपना दबाव बनाकर मामले को रफा- दफा कर दिया, जबकि प्रशासन की तरफ से इस मामले की गहराई के साथ जांच की जानी चाहिए थी और नकली दस्तावेज बनाने वाले आरोपियों पर सख्त एक्शन लेना चाहिए था।

नकली दस्तावेज पेश करने वाले के खिलाफ 7 वर्ष की सजा का प्रावधान

रजिस्ट्री दफ्तरों पर लागू रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत यदि रजिस्ट्री दफ्तरों में तैनात तहसीलदार या सब-रजिस्ट्रार आदि को कोई व्यक्ति नकली दस्तावेज पेश करता है या फिर जाली रजिस्ट्री करवाता है तो पांच लाख रुपये तक जुर्माना और 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है रजिस्ट्री लिखते समय भी यह लिखा जाता है, लेकिन बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से इस बाबत कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, जिससे लैंड माफिया का हौंसला बढ़ता जाता है।

रजिस्ट्री दफ्तरों में भी लैंड माफिया के साथ कर्मचारी सरगर्म 

एच.आर.सी. ब्रांच, रजिस्ट्री दफ्तर की ब्रांचों में कुछ सरकारी कर्मचारी भी ऐसे हैं, जो लैंड माफिया के साथ मिलीभगत किए हुए हैं। समय-समय पर इनके खिलाफ कार्रवाई भी होती है, लेकिन फिर से जुगाड़ लगाकर अपनी नौकरी बचा लेते हैं और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम करते हैं। हाल ही में एच.आर.सी. ब्रांच में जमीनी रिकार्ड टैंपरिंग के कई मामले सामने आए, जिसमें डी.सी. की तरफ से आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करने के लिए भी विजिलेंस विभाग को लिखा गया है, लेकिन लैंड माफिया के दबाव में मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया जा रहा है। एक बड़ी जाली रजिस्ट्री में, जिसमें दर्जा चार कर्मचारी का नाम भी एफ.आई.आर. में शामिल है और ठेका आधारित कर्मचारी भी शक के दायरे में है।

रजिस्ट्री दफ्तरों में जाली रजिस्ट्रियों के कुछ बड़े मामले 

जाली रजिस्ट्रियों का सबसे बड़ा मामला वह है जिसमें जर्मनी में भारत की अंबैसेडर मैडम रचिता भंडारी की जमीन, जो हेर गांव स्थित थी, उसकी 588 गज जमीन की जाली रजिस्ट्री करवा ली गई। इस मामले में 25 जनवरी 2024 को तत्कालीन डी.सी. घनश्याम थोरी की सिफारिश पर खरीददार और नकली रचिता भंडारी खड़ी करने वाले शेर सिंह सहित 6 लोगों पर पर्चा दर्ज किया गया था। इसी तरह सितंबर 2025 और जून 2025 दौरान भी कई और जाली मामले सामने आ चुके हैं जिनकी जांच जारी है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *