8 अप्रैल, 2026:* हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों रोहतक और बहादुरगढ़ में उद्योगों पर बढ़ती लागत और मजदूरों के पलायन का गहरा असर देखने को मिल रहा है। इन दोनों शहरों को लंबे समय से छोटे और मध्यम उद्योगों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों ने यहां के उद्योगों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
जानकारी के अनुसार कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि, बिजली और ईंधन की बढ़ती लागत और अन्य परिचालन खर्चों में इजाफा होने के कारण उद्योगों का संचालन मुश्किल होता जा रहा है। इसके साथ ही मजदूरों का पलायन एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है।
उद्योगपतियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण उन्हें अपने उत्पादों की कीमत बढ़ानी पड़ रही है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया है। कई छोटे उद्योग तो इस दबाव को झेल नहीं पा रहे हैं और उन्हें अपने कामकाज को सीमित करना पड़ रहा है या बंद करने की नौबत आ रही है।
मजदूरों के पलायन के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें बेहतर रोजगार की तलाश, अन्य राज्यों में अधिक वेतन और स्थानीय स्तर पर सुविधाओं की कमी शामिल है। इससे उद्योगों को कुशल और अकुशल दोनों तरह के श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर न केवल स्थानीय उद्योगों पर पड़ेगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
उद्योग संगठनों ने सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि लागत को नियंत्रित किया जा सके और श्रमिकों को रोकने के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकें।
इस स्थिति का असर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ रहा है, क्योंकि उद्योगों के कमजोर होने से नए रोजगार सृजित नहीं हो पा रहे हैं और मौजूदा नौकरियों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
कुल मिलाकर रोहतक और बहादुरगढ़ के उद्योग वर्तमान समय में कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं और उन्हें इस संकट से उबारने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
