6 अप्रैल, 2026:* देश की राजधानी नई दिल्ली में एलपीजी संकट का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में आ रही दिक्कतों ने उनके लिए रोजमर्रा का जीवन कठिन बना दिया है, जिसके चलते उन्होंने यह फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा है।
जानकारी के अनुसार शहर में कमर्शियल और घरेलू गैस की उपलब्धता को लेकर कई इलाकों में समस्याएं सामने आई हैं। छोटे ढाबों, होटलों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों को इसका सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ रहा है। काम की कमी और खर्चों में बढ़ोतरी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है।
प्रवासी मजदूरों का कहना है कि दिल्ली में रहना अब उनके लिए पहले जैसा आसान नहीं रहा। गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और समय पर उपलब्धता न होने से उनके खाने-पीने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें रोजाना की जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाई हो रही है।
रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर घर लौटने वाले लोगों की भीड़ देखी जा रही है। लोग अपने परिवारों के पास वापस जाने का फैसला कर रहे हैं, जहां उन्हें कम खर्च में जीवन यापन की उम्मीद है। यह स्थिति कोरोना महामारी के समय हुए पलायन की याद दिला रही है, हालांकि इस बार कारण अलग है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर दिल्ली की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। निर्माण कार्य, छोटे उद्योग और सेवा क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की कमी हो सकती है, जिससे कई परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
सरकार और प्रशासन की ओर से स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि गैस आपूर्ति को बेहतर बनाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
फिलहाल यह स्थिति राजधानी में चिंता का विषय बनी हुई है और सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में हालात कैसे बदलते हैं।
