5 अप्रैल, 2026:* यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच हरियाणा के एक युवक की दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसका शव सात महीने बाद उसके घर पहुंचा है। यह घटना पूरे क्षेत्र में गहरा दुख और भावनात्मक माहौल पैदा कर रही है, क्योंकि परिवार लंबे समय से अपने बेटे के लौटने की उम्मीद लगाए बैठा था।
जानकारी के अनुसार युवक बेहतर रोजगार के अवसर की तलाश में विदेश गया था, लेकिन युद्ध की परिस्थितियों में वह वहां फंस गया। परिवार ने कई बार उसकी सुरक्षित वापसी के लिए अपील की थी और मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन हालात ऐसे बने कि वह वापस जीवित नहीं लौट सका।
जब युवक का शव उसके गांव पहुंचा तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्य गमगीन माहौल में अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने के लिए इकट्ठा हुए। गांव के लोग भी बड़ी संख्या में वहां पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी।
परिवार का कहना है कि उन्होंने कई महीनों तक प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उन्हें उम्मीद के मुताबिक सहायता नहीं मिल पाई। इस घटना ने विदेशों में काम करने वाले युवाओं की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में काम करने या रहने वाले लोगों के लिए जोखिम बहुत अधिक होता है और ऐसे मामलों में सरकारों को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि विदेशों में बेहतर भविष्य की तलाश में जाने वाले युवाओं को कई बार गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
फिलहाल प्रशासन ने परिवार को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है, लेकिन इस दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
