जालौन 28 मार्च 2026 : उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट लेते हुए किसानों की चिंता बढ़ा दी। तेज धूलभरी आंधी के बाद कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिससे रबी फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
किसानों की मेहनत पर पड़ा बारिश का असर
मौसम में आए इस बदलाव से जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई और मौसम सुहावना हुआ, वहीं इसका सीधा असर किसानों की मेहनत पर पड़ता दिख रहा है। किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं समेत अधिकांश रबी फसलें कटकर खेतों में ढेर के रूप में पड़ी हैं, जो बारिश और ओलों से प्रभावित हो सकती हैं। किशन, रामप्रकाश, पप्पू, संतराम सहित अन्य किसानों ने बताया कि भीगने से फसल की गुणवत्ता खराब होने और वजन में कमी आने की आशंका है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मौसम के जल्द स्थिर होने की उम्मीद कर रहे किसान
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी कटी फसलों को बचाने के लिए उन्हें समेटने, ढकने और सुरक्षित स्थानों पर रखने में जुटे हुए हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी मौसम में उतार-चढ़ाव और हल्की बारिश की संभावना जताई है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसान फिलहाल मौसम के जल्द स्थिर होने की उम्मीद कर रहे हैं।
इतने दिन जारी रहेगा बारिश का सिलसिला (rain alert)
मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी बयान के अनुसार, मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश और बूंदाबांदी से प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इस प्रणाली के कमजोर पड़ने के बाद 28 और 29 मार्च के दौरान अधिकतम तापमान में तीन से छह डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की संभावना है। इसके बाद अगले पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से फिर तापमान में गिरावट देखी जा सकती है। IMD के मुताबिक, 29 मार्च की देर शाम या रात से बारिश का ताजा दौर शुरू हो सकता है, जो मार्च के अंत तक जारी रहने की संभावना है।
किसानों को दी ये सलाह (up weather)
इस बीच, अधिकारियों ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत टोल-फ्री नंबर 14447 पर फसल नुकसान की सूचना देने की सलाह दी है। किसान मोबाइल एप, आधिकारिक पोर्टल और व्हाट्सएप चैटबॉट के जरिए भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए किसान जिला कृषि अधिकारियों या बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों से भी संपर्क कर सकते हैं।
