27 मार्च 2026 : आजकल LPG, PNG, CNG और LNG जैसे नाम अक्सर सुनने को मिलते हैं, लेकिन कई लोग इनके बीच का अंतर समझ नहीं पाते। ये सभी गैसें ऊर्जा के स्रोत हैं, लेकिन इनकी संरचना, उपयोग और सप्लाई का तरीका अलग-अलग होता है।
सबसे पहले बात करें LPG की (Liquefied Petroleum Gas)। यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होती है, जिसे दबाव में तरल रूप में सिलेंडर में भरा जाता है। घरों में खाना पकाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल इसी गैस का होता है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में LPG सिलेंडर आमतौर पर उपयोग में लाए जाते हैं।
अब बात PNG (Piped Natural Gas) की करें। यह प्राकृतिक गैस होती है, जिसे पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों, होटलों और इंडस्ट्री तक पहुंचाया जाता है। इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती, और यह लगातार सप्लाई देती है। बड़े शहरों में PNG का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि यह सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है।
CNG (Compressed Natural Gas) भी प्राकृतिक गैस ही होती है, लेकिन इसे बहुत ज्यादा दबाव में कंप्रेस करके वाहनों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होता है। ऑटो, बसें और कारें बड़ी संख्या में CNG पर चल रही हैं।
LNG (Liquefied Natural Gas) प्राकृतिक गैस का ही एक और रूप है, जिसे बहुत कम तापमान (-162°C) पर तरल बनाया जाता है। इससे गैस का वॉल्यूम कम हो जाता है, जिससे इसे लंबी दूरी तक आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। LNG का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर इंडस्ट्री, पावर प्लांट्स और कुछ भारी वाहनों में किया जाता है।
अगर आसान भाषा में समझें तो LPG घरों के सिलेंडर में, PNG पाइपलाइन से घरों और कमर्शियल जगहों पर, CNG वाहनों में और LNG बड़े उद्योगों व लंबी दूरी के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होती है। चारों गैसों का उद्देश्य ऊर्जा देना है, लेकिन इनके इस्तेमाल का तरीका और जरूरत अलग-अलग है।
