मुंबई 26 मार्च 2026 : प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए बनाई गई CIDCO की हाउसिंग स्कीम को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने करीब 26 हजार घरों की लॉटरी पर अंतरिम रोक लगाते हुए CIDCO और राज्य सरकार को फटकार लगाई है।
हाईकोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि सालाना 6 लाख रुपये से अधिक आय वाले किसी भी व्यक्ति को LIG श्रेणी के तहत घर आवंटित न किए जाएं। साथ ही, जिन लोगों को पहले ही अलॉटमेंट लेटर जारी किए गए हैं, उन्हें फिलहाल घर का कब्जा न देने को कहा गया है।
न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह योजना गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए है, लेकिन नियमों में बदलाव कर अमीरों को इसका लाभ देने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आय सीमा हटाने का क्या तर्क है, और क्या इसका उद्देश्य गरीबों के घर अमीरों को देना है?
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील डॉ. अभिनव चंद्रचूड़ ने दलील दी कि घरों की ऊंची कीमतें और आय सीमा हटाना योजना के मूल उद्देश्य के खिलाफ है और यह राज्य सरकार के जीआर का भी उल्लंघन है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए CIDCO और राज्य सरकार को 10 जून तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है, जबकि अगली सुनवाई 25 जून को होगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का भी जिक्र किया और कहा कि कानून अच्छा हो सकता है, लेकिन उसे लागू करने वाले अगर सही न हों तो उसका उद्देश्य विफल हो जाता है। कोर्ट ने CIDCO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे चिंताजनक बताया।
इस फैसले के बाद हजारों आवेदकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा और अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
