नई दिल्ली 22 मार्च 2026 : ईद-उल-फितर का त्योहार दिल्ली में आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। पवित्र माह रमजान के समापन पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दी।
सुबह की धुंध और हल्की ठंड के बीच बड़ी संख्या में नमाजी ऐतिहासिक जामा मस्जिद व फतेहपुरी के साथ विभिन्न मस्जिदों में पहुंचें, जहां उन्होंने खुदा की इबादत में सिर झुकाकर मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआ मांगी।
जैसे ही मुख्य इमाम की अगुवाई में मस्जिदों में नमाज मुकम्मल हुई, पूरा परिसर ‘ईद मुबारक’ की गूंज सुनाई देने लगी। नए कपड़ों में उछल-कूद मचाते बच्चे लोगों को ईद की बधाई दे रहे थे। हर किसी के चेहरे पर त्योहार का उत्साह झलक रहा था।
जामा मस्जिद के बाहर का दृश्य सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहा था, जहां विभिन्न समुदायों के लोगों ने भी अपने मुस्लिम भाइयों को गले लगकर बधाई दी।
ईदी की खुशी और दान की परंपरा
घरों में सुबह से ही पकवानों की खुशबू महकने लगी थी। नमाज के बाद रिश्तेदारों और दोस्तों का एक-दूसरे के घर जाने का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर शाम तक चलता रहा। बच्चों के लिए यह दिन विशेष रहा, क्योंकि उन्हें बड़ों से ‘ईदी’ के रूप में पैसे और तोहफे मिले। बड़ों से ईदी पाकर बच्चे गलियों में आए झूले वाले को पैसे देकर झूला झूलने में जुट गए। इसी तरह, गुब्बारे और खिलौने बेचने वालों के आसपास भी बच्चों ने घेरा बना लिया था।
लोगों ने अपने आसपास के घरों में ईद की खुशियों का ख्याल रखा और मीठी सेवईं के साथ उपहार भेजवाए। बल्लीमारान के निवासी मो. शाहिद के अनुसार ईद का त्योहार केवल व्यक्तिगत खुशी तक सीमित नहीं है। इस्लाम के मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए लोगों ने ‘फितरा’ (दान) देकर गरीबों और बेसहारा लोगों को भी जश्न में शामिल किया। यह परंपरा समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का संदेश देती है।
बाजारों में जमकर हुई खरीदारी
चांद के दीदार के साथ ही पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में रौनक छा गई थी। मटियामहल, चांदनी चौक, सदर बाजार और बल्लीमारान में लोगों ने ईद को लेकर जमकर खरीदारी की। लोगों देर रात तक परिवार के साथ कपड़ों, जूतों और खान-पान की आखिरी खरीदारी करते दिखे। ईद के विशेष पकवानों, खासकर सेवइयों और मिठाइयों की दुकानों पर ग्राहकों का तांता लगा रहा।
