नई दिल्ली 19 मार्च 2026 : फेसबुक मार्केटप्लेस पर वाॅकी-टाॅकी की बिना अनुमति बिक्री और लिस्टिंग के लिए 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के मेटा प्लेटफाॅर्म ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।
मेटा ने याचिका में तर्क दिया है कि अमेजन और फ्लिपकार्ट के उलट फेसबुक कोई ई-मार्केट न होकर सिर्फ एक नोटिस बोर्ड है। ऐसे में सीसीपीए का इस पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
मामले पर सुनवाई को 25 मार्च के लिए सूचीबद्ध करते हुए न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने यह बताने को कहा कि इस आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर कैसे कहा जा सकता है।
फेसबुक कोई खरीद-बिक्री प्लेटाफार्म नहीं: वकील
अदालत ने सुनवाई के दौरान मेटा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से यह भी पूछा कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) इस मामले पर विचार क्यों नहीं कर सकता?
मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि फेसबुक न तो बिक्री और खरीद के लिए कोई व्यवस्था देता है और न ही उपयोगकर्ताओं से कोई कमीशन लेता है, क्योंकि यह कोई ई-काॅमर्स प्लेटफाॅर्म नहीं है।
हम कोई वर्चुअल खान मार्केट नहीं दे रहे हैं। यह एक नोटिस बोर्ड है, जो सिर्फ फेसबुक उपयोगकर्ताओं के लिए है। फेसबुक कोई दुकान नहीं हैं और यहां कोई व्यवासायिक बिक्री की इजाजत नहीं है। इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया जाता। हम किसी से कोई पैसा नहीं लेते हैं।
एक जनवरी 2026 को जारी अपने आदेश में सीसीपीए ने कहा था कि मेटा ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और उसके नियमों के साथ सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का उल्लंघन किया है, क्योंकि उसने फेसबुक मार्केटप्लेस पर बिना जरूरी जानकारी दिए वाॅकी-टाॅकी की लिस्टिंग की इजाजत दी थी।
