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ईरानी हमलों के बीच बाराबंकी में अल्पकालिक शांति, रातभर मस्जिदों में दुआएं उठीं

उत्तर प्रदेश 01 मार्च 2026 : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में चिंता की लहर पैदा कर दी है। जिले के लगभग एक दर्जन छात्र और इस्लामिक स्कॉलर वर्तमान में ईरान के कोम (Qom) शहर में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हमले के बाद से कई परिवारों का अपने सदस्यों से संपर्क टूट गया है, जिससे घरवाले बेहद डरे हुए हैं।

संपर्क टूटा, सता रही है अनहोनी की चिंता
मिली जानकारी के अनुसार, कोम शहर में मौजूद बाराबंकी के निवासियों में मौलाना जफर अब्बास उर्फ फैजी, आबिद हुसैन काजमी, अली मेहदी रिजवी, सैयद काशिफ रिजवी, फातिमा रबाब, मोहम्मद रजा, मोहम्मद काजिम, मौलाना फैज बाकरी और मौलाना अली मेहदी जैसे नाम शामिल हैं। देर रात एक निजी चैनल की टीमों ने इन परिवारों से मुलाकात की। अधिवक्ता दिलकश रिजवी ने बताया कि शुरुआती हमले के दौरान तो बात हुई थी, लेकिन उसके बाद से दोबारा संपर्क नहीं हो सका है। यही सन्नाटा अब परिजनों की बेचैनी का कारण बना हुआ है।

कोम के बॉर्डर पर धमाके, फिलहाल सामान्य है जनजीवन
मौलाना जफर फैजी के भाई, मौलाना अब्बास मेंहदी ने बताया कि जब उनकी भाई से आखिरी बार बात हुई, तब कोम शहर के सीमावर्ती इलाकों में हमले की खबर मिली थी। हालांकि, उन्होंने राहत की बात यह बताई कि शहर के अंदरूनी हिस्सों में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और लोग अपनी दैनिक गतिविधियों में जुटे हैं।

मस्जिदों में मांगी जा रही दुआएं
बाराबंकी के विभिन्न मोहल्लों और मस्जिदों में लोग इकट्ठा होकर अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष प्रार्थनाएं (दुआ) कर रहे हैं। परिजनों ने भारत सरकार से अपील की है कि वे ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और जरूरत पड़ने पर उनकी घर वापसी के इंतजाम किए जाएं।

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