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Akhilesh Yadav का सीक्रेट प्लान: 2027 टिकट या लखनऊ से विदाई, सपा नेताओं की बढ़ी बेचैनी

27 फरवरी 2026 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अभी से सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने इस बार टिकट वितरण के लिए एक ऐसा गोपनीय क्राइटेरिया तैयार किया है, जिसने पार्टी के अंदर खलबली मचा दी है। अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ लखनऊ के पार्टी दफ्तर में हाजिरी लगाने और नेताओं के पीछे घूमने से टिकट नहीं मिलेगा, बल्कि जमीन पर पसीना बहाने वालों की ही किस्मत चमकेगी।

तैयार हो रही है कार्यकर्ताओं की खास लिस्ट
सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने अपने रणनीतिकारों को एक विशेष लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस लिस्ट में पार्टी के हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता की गतिविधियों का पूरा लेखा-जोखा रखा जा रहा है। सपा प्रमुख उन कार्यकर्ताओं से काफी नाराज हैं जो सिर्फ लखनऊ या दिल्ली के कार्यालयों के चक्कर काटते हैं और जमीन पर काम नहीं करते। ऐसे ‘चेहरा चमकाने’ वाले नेताओं को इस बार टिकट की दौड़ से बाहर रखा जा सकता है। टिकट पाने के लिए सबसे पहली और बड़ी शर्त यह रखी गई है कि कार्यकर्ता ने विशेष मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम में कितनी सक्रियता दिखाई है। जिन्होंने बूथ स्तर पर नए वोट बनवाने और लिस्ट दुरुस्त कराने में मेहनत की है, उन्हें ही प्राथमिकता दी जाएगी।

ग्राउंड रिपोर्ट ही तय करेगी माननीय का भविष्य
सपा अब पूरी तरह से चुनावी मोड में है। अखिलेश यादव की पैनी नजर उन लोगों पर है जो सिर्फ मंच पर साथ दिखने के लिए धक्का-मुक्की करते हैं। पार्टी का नया मंत्र है— “काम करो, इनाम पाओ।” जो कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों का प्रचार कर रहे हैं और मतदाताओं को जोड़ने में जुटे हैं, उन्हें अखिलेश यादव खुद इनाम (टिकट) देंगे। इस गोपनीय लिस्ट के जरिए उन नेताओं की भी पहचान की जा रही है जो पार्टी के भीतर गुटबाजी को बढ़ावा देते हैं।

रणनीति के पीछे की वजह
सपा नेतृत्व का मानना है कि पिछले चुनावों में कुछ गलत टिकट वितरण की वजह से जीत का फासला रह गया था। इसीलिए 2027 के लिए अखिलेश यादव कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। वे एक ऐसी टीम तैयार कर रहे हैं जो ‘नेताओं की’ नहीं, बल्कि ‘जनता की’ पसंद हो।

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