मोहाली, 26 फरवरी 2026: नेचुरल प्रोडक्ट्स विभाग, राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर), मोहाली, भारत, एथ्नोफार्माकोलॉजी सोसायटी (एसएफई), कोलकाता, भारत के सहयोग से संयुक्त रूप से 13वीं अंतरराष्ट्रीय एथ्नोफार्माकोलॉजी सोसायटी कांग्रेस तथा एथ्नोफार्माकोलॉजी में ट्रांसलेशनल रिसर्च पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (एसएफईसी-आईसीटीआरई 2026) — “आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक चिकित्सा का एकीकरण” का आयोजन 26–28 फरवरी, 2026 को नाइपर-मोहाली, पंजाब में कर रहा है।
सम्मेलन का विषय, “एआई एवं एथ्नोफार्माकोलॉजी इन ट्रांसलेशनल रिसर्च,” प्राचीन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक प्रगतियों एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़ने का उद्देश्य रखता है, जिससे प्राकृतिक उत्पाद अनुसंधान और औषधि खोज के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन मिल सके।
उद्घाटन समारोह आज संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के महानिदेशक प्रो. रबिनारायण आचार्य ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
प्रो. दुलाल पांडा, निदेशक, नाइपर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, विशिष्ट वक्ताओं, प्रतिनिधियों तथा अन्य अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह सम्मेलन पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक जैव-चिकित्सीय विज्ञान तथा उन्नत विश्लेषणात्मक प्रौद्योगिकियों के साथ समन्वित करने की एक प्रगतिशील दृष्टि को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि यह आयोजन प्राकृतिक उत्पादों और पारंपरिक चिकित्सा के तीव्र गति से विकसित हो रहे क्षेत्र में ज्ञान-विनिमय, नवाचार, सहयोग तथा नीतिगत संवाद के लिए एक सशक्त वैश्विक मंच के रूप में कार्य कर रहा है।
प्रो. संजय एम. जाचक, आयोजन सचिव, एसएफई–आईसीटीआरई 2026 ने कांग्रेस का संक्षिप्त अवलोकन प्रस्तुत किया। प्रो. पुलोक कुमार मुखर्जी, संस्थापक, एसएफई–कोलकाता ने कार्यक्रम की दृष्टि एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। डॉ. सी. के. कटियार ने एसएफई के अध्यक्ष की ओर से उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। उद्घाटन सत्र में एसएफई पुरस्कार समारोह तथा सिस्टम्स एथ्नोफार्माकोलॉजी एंड सस्टेनेबल बायोरिसोर्सेज (SESB) की संपादकीय टीम का सम्मान भी किया गया। ‘हरिहर मुखर्जी स्मृति पुरस्कार व्याख्यान’ आचार्य बालकृष्ण द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि प्रो. रबिनारायण आचार्य का संबोधन हुआ, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय मानक ब्यूरो एथ्नोमेडिसिन के लिए मानकों का विकास कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार पारंपरिक चिकित्सा को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है, जिससे इस क्षेत्र का भविष्य अत्यंत आशाजनक है।
तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में 500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिनमें यूरोप एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के 10 से अधिक देशों से आए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ता शामिल हैं। प्रतिभागियों में वैज्ञानिक, शिक्षाविद, पारंपरिक वैद्य, नीति-निर्माता, नियामक विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, आयुष विशेषज्ञ, स्टार्ट-अप उद्यमी, शोधार्थी एवं छात्र सम्मिलित हैं—जिससे यह क्षेत्रीय स्तर पर एथ्नोफार्माकोलॉजी के क्षेत्र की सबसे बड़ी सभाओं में से एक बन गया है।
कांग्रेस की प्रमुख विशेषताएं:
- अकादमिक–उद्योग संवाद कार्यक्रम
- पारंपरिक वैद्य सम्मेलन
- आयुष संगोष्ठी
- एआई एवं सिस्टम्स एथ्नोफार्माकोलॉजी सत्र
- तकनीकी कार्यशालाएं
- पैनल चर्चाएं
वैज्ञानिक विचार-विमर्श में अत्याधुनिक विषयों को शामिल किया गया है, जिनमें मेटाबोलोमिक्स-आधारित दृष्टिकोण, नेटवर्क फार्माकोलॉजी, स्वास्थ्य एवं रोग में गट माइक्रोबायोटा की भूमिका, प्राकृतिक उत्पादों का बायोप्रॉस्पेक्टिंग, न्यूट्रास्यूटिकल्स एवं फाइटोफार्मास्यूटिकल्स, प्राकृतिक उत्पादों की औषधीय रसायनिकी, रेगुलेटरी अफेयर्स, हर्बल औषधि विकास में सतत प्रौद्योगिकियां, फार्मुलेशन विकास तथा ट्रांसलेशनल औषधि खोज जैसे विषय सम्मिलित हैं।
हिमालय वेलनेस कंपनी, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, सामी-सैबिन्सा ग्रुप लिमिटेड, फार्मांजा हर्बल्स प्राइवेट लिमिटेड, नैचुरल रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड, इमामी लिमिटेड, स्पिनको बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, एन्क्रोम एंटरप्राइजेज तथा वाटर्स कॉर्पोरेशन सहित प्रमुख हर्बल एवं न्यूट्रास्यूटिकल उद्योगों ने सम्मेलन को अपना समर्थन प्रदान किया है।
एल्सेवियर, जो विश्व-प्रसिद्ध शैक्षणिक प्रकाशन एवं वैज्ञानिक सूचना विश्लेषण कंपनी है और अग्रणी पीयर-रिव्यूड शोध पत्रिकाओं के प्रकाशन तथा वैश्विक स्तर पर अनुसंधान प्रसार के लिए जानी जाती है, ने भी सम्मेलन में गहरी रुचि व्यक्त की है। प्रो. पुलोक कुमार मुखर्जी ने बताया कि सम्मेलन के दौरान एसएफई, भारत की आधिकारिक पत्रिका सिस्टम्स एथ्नोफार्माकोलॉजी एंड सस्टेनेबल बायोरिसोर्सेज (SESB) पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जो एल्सेवियर पब्लिकेशंस – फार्मास्यूटिक्स एवं फार्माकोलॉजी की वरिष्ठ प्रबंधक सुश्री ऐन मेरी की उपस्थिति में संपन्न होगी।
एथ्नोफार्माकोलॉजी सोसायटी (एसएफई), भारत, जो पश्चिम बंगाल सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत है तथा इंटरनेशनल सोसायटी फॉर एथ्नोफार्माकोलॉजी (आईएसई) से संबद्ध है, औषधीय पौधों, पारंपरिक चिकित्सा और प्राकृतिक उत्पादों के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा ज्ञान के वैश्विक प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है।
सोसायटी का मोटो स्थानीय ज्ञान के वैश्वीकरण एवं वैश्विक प्रौद्योगिकियों के स्थानीयकरण के माध्यम से प्राकृतिक स्वास्थ्य उत्पादों संबंधी ज्ञान का व्यापक प्रसार करना है।
नाईपर मोहाली, जिसे 1994 में भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय, औषध विभाग के अंतर्गत स्थापित किया गया था, एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है जो फार्मास्यूटिकल शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता के लिए समर्पित है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने इस महा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन में नाईपर मोहाली के प्रयासों की सराहना की और अपना समर्थन प्रदान किया है।
एसएफईसी–आईसीटीआरई 2026 का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने के लिए इसके वैज्ञानिक सत्यापन, सतत उपयोग और वैश्विक समावेश को मजबूत करना है।
