मुंबई 17 फरवरी 2026 : माजी उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar के विमान हादसे वाले दिन ही अल्पसंख्यक विकास विभाग से कई संस्थाओं को अल्पसंख्यक शैक्षणिक दर्जा दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि ये प्रमाणपत्र आर्थिक लेन-देन के जरिए जारी किए गए, जबकि विभाग का कहना है कि तकनीकी कारणों से अटके प्रमाणपत्र संयोगवश उसी दिन जारी हुए।
भाषाई या धार्मिक आधार पर शैक्षणिक संस्थाओं को अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाता है। इसके लिए राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग में आवेदन करना होता है। विभागीय उपसचिव स्तर पर सुनवाई और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। फिलहाल मार्च 2025 से विशेष अभियान चलाकर पहले से अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त संस्थाओं से दस्तावेज मंगाए जा रहे हैं, जिसके खिलाफ कुछ संस्थाएं अदालत भी गई हैं।
सुनेत्रा पवार के आदेश
उपमुख्यमंत्री एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री Sunetra Pawar ने निर्देश दिए हैं कि “गलत तरीके से अल्पसंख्यक दर्जा देने के मामलों की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए उपलब्ध निधि पारदर्शी और समान रूप से वितरित होनी चाहिए तथा विभाग का कामकाज अधिक जवाबदेह बने।
सह्याद्री राज्य अतिथिगृह में हुई समीक्षा बैठक में सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है और दिवंगत अजित पवार की नीतियों के अनुरूप योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें छात्रवृत्ति, छात्रावास, मौलाना आज़ाद अल्पसंख्यक आर्थिक विकास महामंडल और जैन आर्थिक विकास महामंडल की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
12 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन मंत्री माणिकराव कोकाटे ने 1 अगस्त 2025 से अल्पसंख्यक दर्जा पाने वाली संस्थाओं की समीक्षा के आदेश दिए थे और अगली सूचना तक मान्यता पर रोक लगाने को कहा था। बावजूद इसके, अजित पवार के विमान हादसे के दिन दोपहर 3 बजे एक प्रमाणपत्र जारी हुआ और आरोप है कि कार्यालय समय के बाद भी प्रमाणपत्र बांटे गए।
युवा कांग्रेस नेता अक्षय जैन का दावा है कि सरकारी शोक और छुट्टी के दिन करीब 75 प्रमाणपत्र 20 अलग-अलग संस्थाओं को दिए गए। उन्होंने इसकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
विभाग का स्पष्टीकरण
अल्पसंख्यक विकास विभाग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केवल 8 संस्थाओं को ही उस दिन प्रमाणपत्र दिए गए थे और उनकी सुनवाई पहले ही सक्षम अधिकारियों द्वारा हो चुकी थी। वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कत के कारण प्रमाणपत्र अपलोड नहीं हो पाए थे, जो समस्या दूर होते ही 28 जनवरी को जारी किए गए। विभाग के अनुसार इसमें कोई अनियमितता नहीं हुई है।
